कोर्ट में दाखिल हलफनामा फर्जी! अविमुक्तेश्वरानंद की प्रेस कांफ्रेंस में वकील पीएन मिश्रा ने रखा पक्ष
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पदवी विवाद पर अपना पक्ष रखा. प्रशासन द्वारा नाम के आगे शंकराचार्य लगाने पर नोटिस दिए जाने के बाद, उनके वकील पीएन मिश्रा ने कोर्ट में फर्जी हलफनामे से अयोग्य ठहराने की कोशिश का खुलासा किया. अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा बताया और स्पष्ट किया कि उनका पट्टाभिषेक 2022 में हो चुका है. मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस कर उठे विवाद पर अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कहा कि कल भी उन्होंने अपनी बात रखी थी. फिर देर रात प्रशासन ने उनके शिविर में आकर नोटिस लगा दिया. इसमें उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया और पूछा किया कि उन्होंने अपने नाम के आगे शंकराचार्य क्यों लगाया. जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है. इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट में उनके वकील पीएन मिश्रा ने जवाब दिया.
उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की तरफ से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को शंकरचार्य बनाया गया था. लेकिन कोर्ट में फर्जी हलफनामा लगाकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अयोग्य घोषित करने की कोशिश की गई. वकील पीएन मिश्रा के मुताबिक माघ मेले में 15 शंकराचार्य ऐसे बैठे हैं, जिनको सुविधाएं दी गई हैं. इस प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों के बारे में भी बताया. कहा कि अब प्रशासन न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना चाहता है.
कहा- 12 सितंबर 2022 को हो गया पट्टाभिषेक
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनका पट्टाभिषेक 12 सितंबर 2022 को ही हो चुका है. उन्हें चादर और तिलक लगाया गया था. 2023 में उन्होंने शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. यह याचिका अभी लंबित है. उनके वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि वासुदेवानंद सरस्वती जी ने झूठा हलफनामा कोर्ट में दाखिल किया है. वकील के मुताबिक वह प्रशासन के नोटिस के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं.
कहां लिखा है कि शंकराचार्य नहीं लिख सकते?
इस मौके पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाया और पूछा कि इसमें कहा लिखा है कि नाम के आगे शंकराचार्य नहीं लिखना है. उहोंने कहा कि हम कोई पट्टाभिषेक माघ मेले में थोड़ी कर रहे है. उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार कोर्ट में पार्टी है. तीन साल से मामला पेंडिंग है. उन्होंने कहा कि वह गोहत्या बंद करने की मांग कर रहे हैं. इसलिए उन्हें नोटिस दिया गया है. लेकिन अब हम भी प्रशासन को एक नोटिस दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक कार्रवाई में दखलअंदाजी है.