मुहर्रम से पहले एक बार फिर राजा भैया के पिता समेत 13 लोग नजरबंद, जानिए क्यों?
प्रतापगढ़ में मुहर्रम के मद्देनजर प्रशासन ने एहतियाती कार्रवाई करते हुए कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैयैया के पिता उदय प्रताप सिंह समेत 13 लोगों को नजरबंद कर दिया है. गुरुवार सुबह भारी पुलिस बल भदरी किले पहुंचा और आदेश की प्रति चस्पा की गई. प्रशासन के अनुसार, सभी लोगों को शुक्रवार रात तक पुलिस निगरानी में अपने आवास पर रहना होगा.
प्रतापगढ़ जिले में मुहर्रम के मद्देनजर प्रशासन ने एक बार फिर एहतियाती कदम उठाते हुए कुंडा विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह समेत 13 लोगों को नजरबंद कर दिया है. गुरुवार सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई के तहत भारी पुलिस बल भदरी किले पहुंचा और मुख्य गेट पर नोटिस चस्पा कर आदेश की जानकारी दी. प्रशासन के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बनाए रखने यह कदम उठाया गया है.
जानकारी के अनुसार, कुंडा एसडीएम के आदेश पर उदय प्रताप सिंह और अन्य 12 लोगों को गुरुवार सुबह 5 बजे से शुक्रवार रात 9 बजे तक नजरबंद रखा जाएगा. इस दौरान सभी लोग पुलिस की निगरानी में अपने-अपने आवासों पर रहेंगे और बिना प्रशासनिक अनुमति के बाहर नहीं जा सकेंगे. प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह एहतियातन की गई है और इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना है.
भदरी किले पर पहुंची पुलिस
गुरुवार तड़के ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम भदरी किले पहुंची. वहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए आदेश की प्रति चस्पा की गई. इसके साथ ही उदय प्रताप सिंह को औपचारिक रूप से नजरबंदी की सूचना दी गई. किले और आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार इलाके का दौरा कर रहे हैं और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.
2015 के विवाद से जुड़ा है पूरा मामला
उदय प्रताप सिंह की नजरबंदी का मामला साल 2015 में हुए उस विवाद से है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था. कुंडा क्षेत्र के शेखपुर आशिक गांव में स्थित एक हनुमान मंदिर पर बंदर की मौत की वार्षिकी मनाने की परंपरा है. इसी दौरान मुहर्रम का जुलूस भी निकलता है. साल 2015 में इन दोनों कार्यक्रमों के समय को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई थी.
उस समय प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा था. हालांकि स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया था, लेकिन इसके बाद से प्रशासन हर वर्ष मुहर्रम के दौरान विशेष सतर्कता बरतता है. इसी क्रम में उदय प्रताप सिंह को एहतियातन नजरबंद किए जाने की परंपरा भी शुरू हुई.

हर साल होती है ऐसी कार्रवाई
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, 2015 के बाद से लगभग हर साल मुहर्रम के दौरान उदय प्रताप सिंह को नजरबंद किया जाता है. प्रशासन का मानना है कि ऐसा करने से किसी भी संभावित विवाद या तनावपूर्ण स्थिति को पहले ही रोका जा सकता है. स्थानीय स्तर पर यह व्यवस्था अब एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का रूप ले चुकी है. मुहर्रम से पहले जिला प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों की समीक्षा करता है और आवश्यकता पड़ने पर एहतियाती कदम उठाता है.
प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
मुहर्रम के जुलूसों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है. जिले के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है और अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है. किसी भी भ्रामक या भड़काऊ पोस्ट पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा स्थानीय धर्मगुरुओं और गणमान्य लोगों से भी संवाद स्थापित किया गया है.
पुलिस निगरानी में रहेंगे उदय प्रताप सिंह
प्रशासन के आदेश के अनुसार उदय प्रताप सिंह निर्धारित अवधि तक अपने आवास से बाहर नहीं निकल सकेंगे. इस दौरान पुलिसकर्मी उनके आवास के बाहर तैनात रहेंगे और गतिविधियों पर नजर रखेंगे. अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह निवारक कार्रवाई है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई है. प्रशासन का कहना है कि उसका एकमात्र उद्देश्य शांति बनाए रखना और किसी भी संभावित विवाद को रोकना है.
