राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आरोपी अविनाश के मां-बाप बोले- अब कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बचे
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ल के परिवार ने बेटे की गिरफ्तारी के बाद गहरा दुख जताया है. प्रतापगढ़ निवासी उसके पिता राम सजीवन शुक्ल का कहना है कि इस घटना के बाद परिवार सामाजिक और मानसिक दबाव में है. मां मिथिलेश ने कहा कि यदि बेटे से गलती हुई होगी तो उसे सजा मिले, लेकिन यदि वह निर्दोष है तो उसे न्याय मिलना चाहिए.
अयोध्या स्थित राम मंदिर चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ल की गिरफ्तारी ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है. प्रतापगढ़ जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले उसके बूढ़े माता-पिता का कहना है कि बेटे का नाम इस मामले में आने के बाद पूरा परिवार टूट गया है. गांव में लोगों के सवालों का सामना करना मुश्किल हो गया है और अब ऐसा लगता है कि कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं.
चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार अविनाश शुक्ल के पिता राम सजीवन शुक्ल बताते हैं कि उनका बेटा साल 2025 में अयोध्या गया था, उससे पहले उनका बड़ा बेटा अभिषेक शुक्ल साल 2021 में प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में नियुक्त हुआ था और उसी समय से अयोध्या में रह रहा है. पिता के अनुसार, अविनाश भी पिछले करीब एक वर्ष से अपने बड़े भाई अभिषेक के साथ अयोध्या में रह रहा था, दोनों भाइयों की अभी शादी नहीं हुई है.
‘कर्मों का फल भगवान श्रीराम ही देंगे’
राम सजीवन शुक्ल का कहना है, ‘परिवार को उम्मीद थी कि दोनों बेटे नौकरी करेंगे तो घर की आर्थिक स्थिति और बेहतर होगी, लेकिन अब पूरा परिवार मुश्किल दौर से गुजर रहा है.’ उनका कहना है कि राम मंदिर जैसे करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े मामले में नाम आने के बाद परिवार खुद को सामाजिक और मानसिक दबाव में महसूस कर रहा है. हालांकि परिजन बार-बार यही कहते हैं कि सच क्या है, इसका फैसला अदालत करेगी और कर्मों का फल भगवान श्रीराम ही देंगे.
‘कहीं मुंह दिखाने लायक भी नहीं बचे’
राम सजीवन शुक्ल कहते हैं कि बेटे की गिरफ्तारी के बाद गांव और रिश्तेदारी में तरह-तरह की बातें हो रही हैं… लोग सवाल पूछ रहे हैं और परिवार किसी को जवाब देने की स्थिति में नहीं है. उनका कहना है कि जो भी सच होगा, वह जांच और अदालत के सामने आएगा, लेकिन फिलहाल पूरा परिवार मानसिक रूप से टूट चुका है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब तो कहीं मुंह दिखाने लायक भी नहीं बचे हैं.
मां की आंखों से नहीं रुक रहे आंसू
अविनाश की मां मिथिलेश भी बेटे की गिरफ्तारी के बाद बेहद दुखी हैं. बेटे को लेकर पूछे गए हर सवाल पर उनकी आंखें भर आती हैं. उनका कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को ईमानदारी से पाला है और कभी किसी का बुरा नहीं चाहा. मां का कहना है कि अब सब कुछ भगवान राम के हाथ में है, अगर बेटे से कोई गलती हुई होगी तो उसका फल भगवान देंगे और यदि वह निर्दोष होगा तो भगवान ही उसे न्याय दिलाएंगे.
पांच बेटों का परिवार
राम सजीवन शुक्ल और उनकी पत्नी मिथिलेश के कुल पांच बेटे हैं. परिवार के तीन बेटे गांव में रहकर खेती-बाड़ी करते हैं. एक बेटा गांव में डिस्पेंसरी चलाता है. चौथे नंबर पर अभिषेक हैं, जो अयोध्या में प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं. सबसे छोटा बेटा अविनाश भी अयोध्या में रह रहा था. परिवार का कहना है कि अभिषेक अपनी नौकरी से हर महीने घर खर्च के लिए पैसे भेजता था, उसी पैसे से खेती-बाड़ी का खर्च चलता था, अविनाश भी जब गांव आता था तो दो-चार हजार रुपये माता-पिता को देकर उनकी मदद करता था.
14 बीघा जमीन, कच्चे मकान में रहते हैं माता-पिता
राम सजीवन बताते हैं कि उनके पास करीब 14 बीघा कृषि भूमि है… परिवार खेती करता है और ट्रैक्टर से खेती-बाड़ी का काम होता है. खेती के साथ-साथ बेटों की कमाई से परिवार का खर्च चलता रहा है. गांव में उनका जीवन बेहद सामान्य रहा है और कभी किसी बड़े विवाद में परिवार का नाम नहीं आया. परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं. हालांकि, राम सजीवन बताते हैं कि वे आज भी अपने पुराने जर्जर कच्चे मकान में पत्नी के साथ रहते हैं.

जिस घर की बात राम सजीवन कर रहे हैं, उसी घर के पास एक नया पक्का मकान भी बनाया गया है, जिसमें उनके तीन बेटे और उनकी बहुएं रहती हैं. राम मंदिर चढ़ावा मामले में अविनाश शुक्ल की गिरफ्तारी के बाद पूरा गांव इस घटना की चर्चा कर रहा है. कोई परिवार के प्रति सहानुभूति जता रहा है तो कोई जांच पूरी होने का इंतजार करने की बात कह रहा है. गांव के लोगों का कहना है कि इतने बड़े मामले में नाम आने के बाद परिवार पर सामाजिक दबाव स्वाभाविक है.
परिवार की एक ही गुहार
परिवार का कहना है कि वे कानून का सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो. उनका कहना है कि अगर बेटा दोषी है तो कानून अपना काम करे, लेकिन यदि वह निर्दोष है तो उसे न्याय मिलना चाहिए.
