RO-ARO भर्ती: OBC को 42% और जनरल को 28% हिस्सेदारी; विवाद बढ़ने पर HC ने ज्वाइनिंग पर लगाई रोक

RO-ARO भर्ती 2023 में OBC को 42% और समान्य वर्ग को 28% प्रतिनिधित्व मिला है, लेकिन चयनितों की जॉइनिंग पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का गहन अध्ययन कर रहा है. वहीं, आयोग हाईकोर्ट में अपना मजबूत पक्ष रखने की तैयारी में है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की RO-ARO परीक्षा-2023 के अंतिम परिणाम में ओबीसी वर्ग की बंपर सफलता और सामान्य वर्ग के कम प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद गरमा गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे हजारों अभ्यर्थी असमंजस की स्थिति में हैं.

आयोग द्वारा 5 अप्रैल 2026 को घोषित अंतिम परिणाम के अनुसार, कुल 419 पदों पर चयन हुआ. इनमें 176 अभ्यर्थी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से चयनित हुए, जो कुल चयनितों का लगभग 42 प्रतिशत है. वहीं सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की संख्या मात्र 28.16 प्रतिशत रही. इस आंकड़े ने सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों में आक्रोश पैदा कर दिया है.

OBC संगठन इसे सामाजिक न्याय की जीत बता रहे

सामान्य वर्ग के कई अभ्यर्थियों का आरोप है कि आरक्षण की सीमा का उल्लंघन कर ओबीसी वर्ग को अत्यधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है. उन्होंने इस मामले को अदालत में चुनौती भी दी है. हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल ज्वाइनिंग प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. यह फैसला आने वाले दिनों में RO-ARO भर्ती की पूरी प्रक्रिया पर असर डाल सकता है.

RO-ARO परिणाम अब केवल नौकरी की भर्ती नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बन गया है. विपक्षी दलों समेत कई संगठन इस आंकड़े को लेकर सवाल उठा रहे हैं. वहीं OBC संगठन इसे सामाजिक न्याय की जीत बता रहे हैं. UPPSC ने हालांकि स्पष्ट किया है कि चयन पूरी तरह से नियमों के अनुसार और मेरिट के आधार पर किया गया है.

HC में UPPSC आरक्षण पर रखेगा अपना मजबूत पक्ष

हाईकोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग पर रोक लगा दी है. कोर्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का गहन अध्ययन कर रहा है, खासकर प्रारंभिक परीक्षा को ‘सूटेबिलिटी एग्जाम’ मानने और आरक्षण को अंतिम चयन चरण में लागू करने संबंधी सिद्धांतों पर. हाईकोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई जल्द करेगा, जहां UPPSC को अपना मजबूत पक्ष रखना है.

आयोग सचिव गिरिजेश त्यागी ने कहा कि RO-ARO भर्ती प्रक्रिया में आयोग ने विज्ञापन की शर्तों और 1994 तथा 1986 की स्थापित नियमावलियों का पूरी तरह पालन किया है. त्रिस्तरीय परीक्षा प्रणाली में प्रारंभिक परीक्षा केवल स्क्रीनिंग और उपयुक्तता तय करने के लिए होती है, जबकि अंतिम चयन मुख्य परीक्षा, टंकण परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किया जाता है.

आयोग सचिव का कहना है कि ऐसे में फाइनल रिजल्ट में ओबीसी वर्ग को मिला 42 प्रतिशत प्रतिनिधित्व यह साबित करता है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सामाजिक न्याय के अनुरूप रही है. इसको लेकर आयोग हाईकोर्ट में अपना मजबूत पक्ष रखेगा. दायर याचिकाओं में आरक्षण और माइग्रेशन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं.

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