बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने की बात, दिया बड़ा ऑफर

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई. इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अलंकार अग्निहोत्री को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए धर्म के क्षेत्र में काम करने का ऑफर दिया है.

अविमुक्तेश्वरानंद, अलंकार अग्निहोत्री

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने टेलीफोन पर बात की. इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अलंकार अग्निहोत्री के निर्णय को लेकर अपनी स्पष्ट और भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उनसे कहा आपके इस्तीफे से मेरे मन में दो प्रकार की प्रतिक्रियाएं उत्पन्न हुई हैं. पहली प्रतिक्रिया पीड़ा की है, लोगो को एडीएम सिटी जैसे पद तक पहुंचने के लिए कई सालों की कठिन मेहनत, लगन और अनुशासित अध्ययन से गुजरना पड़ता है. कई परीक्षाओं में सफल होने के बाद ये पद मिलता है. ऐसे में आपका इस्तीफा बेहद दुखद है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री से आगे कहा कि आपके फैसले से उनके मन में दूसरी जो प्रतिक्रिया आई, वह गर्व और संतोष की है. आपने जिस प्रकार सनातन धर्म के प्रति अपनी गहन निष्ठा और आस्था का परिचय दिया है उससे समस्त सनातनी समाज स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अलंकार अग्निहोत्री को ऑफर

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ऐसे निष्ठावान लोग बिरले होते हैं. सनातन समाज उनके इस निर्णय का हृदय से स्वागत और अभिनंदन करता है. आप जैसे समर्पित और साहसी लोग जब धर्म की सेवा के लिए आगे आते हैं तो यह समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनता है. शंकराचार्य ने ये भी कहा कि आपको सरकार की तरफ दिया गया पद भले ही आज न रहा हो, लेकिन धर्म के क्षेत्र में उससे भी बड़ा और अधिक सम्मानजनक दायित्व वाला पद आपको सौंपने का प्रस्ताव दे रहा हूं.

क्यों अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से दिया इस्तीफा

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी यानी सोमवार को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. इसके पीछे उन्होंने UGC नियम और प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान को वजह बताया. उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा है कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी खींचे जाने जैसी घटन किसी भी साधारण ब्राह्मण को अंदर से हिला देती है. इस घटना से वे बेहद आहत हैं.

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के पीछे का एक कारण भारत सरकार के नए कानून UGC 2026 को भी बताया. उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के हितों की बात रखने वाला कोई प्रतिनिधि नजर नहीं आ रहा. सरकार में बैठे भी सामान्य वर्ग के जनप्रतिनिधि चुप हैं. पूरा सामान्य वर्ग खुद को असहाय और असुरक्षित महसूस कर रहा है.

अलंकार अग्निहोत्री को किया गया निलंबित

अलंकार अग्निहोत्री का बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने से प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है. अब राज्य सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री पर कार्रवाई करते हुए अलंकार अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए कमेटी भी गठित कर दी गई है. साथ ही में बरेली मंडल के मंडलायुक्त को इसका जांच अधिकारी बनाया गया है.

क्या है यूजीसी का नया कानून?

यूजीसी ने 13 जनवरी को एक नया नियम लागू किया है. इसका नाम है – ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026’. यूजीसी के मुताबिक नए नियमों को इसलिए लाया गया है ताकि एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोका जा सकें, ऐसे कृत्यों पर निगरानी रखी जा सके. नए Equity Rule के तहत सभी यूनिवर्सिटी, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में 24×7 हेल्पलाइन, Equal Opportunity Centre, Equity Squads और Equity Committee का गठन करना होगा. इन नियमों का पालन नहीं करने पर यूजीसी संस्थानों की मान्यता रद्द करने या फंड रोकने जैसी सख्त कार्रवाई कर सकता है.

यूजीसी के इस कानून का क्यों विरोध?

यूजीसी के इस कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है. पीआईएल में इस नियम को भेदभावपूर्ण और मनमाना बताया गया है. इस कानून का विरोध करने वालों का कहना है कि यूजीसी के Equity Rule का सेक्शन 3(C) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत आजादी जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. यह नियम यूजीसी अधिनियम 1956 के विरुद्ध है और उच्च शिक्षा में समान अवसर देने के अवसर को खत्म करता है. इसी तरह के साथ याचिका में इन प्रावधानों को हटाने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की गई है.

सामान्य वर्ग के छात्रा का यूजीसी कानून के विरोध में क्या है तर्क?

सामान्य वर्ग के छात्रों का तर्क है कि इसमें झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है. इस वजह से किसी पर भी बिना किसी सबूत के झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं. इससे कई छात्रों का करियर प्रभावित हो सकता है. छात्रों का कहना है कि इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व को जरूरी नहीं बताया गया है. वहीं इक्विटी स्क्वाड को भी काफी अधिकार दे दिए गए हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटक सकता है. इसके अलावा ‘भेदभाव’ परिभाषा स्पष्ट नहीं की गई है.