ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े ऐसे मामलों पर पुलिस नहीं करेगी कार्रवाई, अब से यहां मिलेगी मदद
साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन मर्चेंट्स साइट्स की शिकायतों के चलते पुलिस थानों पर भारी दबाव आया है. इसी को देखते हुए अब डीजीपी की तरफ से नई गाइडलाइन आई है. इसके मुताबिक अब ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े डिस्पूयट के मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करेगी.
यूपी पुलिस ने ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है. डीजीपी मुख्यालय की ओर से जारी ताजा गाइडलाइन के मुताबिक अगर अब ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर पर मिलने वाले खराब क्वॉलिटी के सामान, बेकार प्रोडक्ट, साइज से जुड़ी समस्याओं की शिकायत सीधे पुलिस से नहीं कर सकेंगे. अब ग्राहकों को ये मामले कंपनी की आधिकारिक शिकायत प्रणाली या फिर उपभोक्ता फोरम में ही जाकर सुलझाने होंगे.
दरअसल, हाल के कुछ महीनों में साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन मर्चेंट साइट्स से जुड़ी शिकायतें बढ़ी हैं. इन शिकायतों के चलते पुलिस स्टेशनों पर भारी दबाव पड़ रहा था. इनमें से अधिकतर मामले धोखाधड़ी की बजाय सर्विस डिस्पयूट के थे. डीजीपी की तरफ से जारी गाइडलाइन के मुताबिक ये सभी विवाद सिविल प्रकृति के हैं और इन्हें उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत ही सुलझाए जाने चाहिए.
इस स्थिति में ही पुलिस दर्ज करेगी केस
अब पुलिस की तरफ से खराब सामान, गलत डिलीवरी या रिफंड ना मिलने पर तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं होगा. अब ग्राहक पहले कंपनी या फोरम में शिकायत दर्ज कराएं. अगर 30 दिन के अंदर मामले का समाधान नहीं होता है तो जिला उपभोक्ता फोरम में अर्जी दें. अगर कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में धोखाधड़ी साबित हो जाती है तो पुलिस केस दर्ज करेगी. अगर ऐसे मामलों को लेकर कोई सीधे पुलिस के पास पहुंचता है तो वहां ऐसी शिकायतों को “उपभोक्ता फोरम/कंपनी के पास भेजा गया” मार्क कर क्लोज कर दिया जाएगा.
साइबर क्राइम के ऐसे मामलों पर पुलिस करती है कार्रवाई
पुलिस उन्हीं मामलों की शिकायत दर्ज करेगी जहां असल में साइबर फ्रॉड का मामला है. उदाहरण के तौर पर फेक वेबसाइट से पैसे कट गए, OTP शेयर करने पर अकाउंट खाली हो गया या फिशिंग लिंक की चपेट में आ गए हों. वहीं, अगर आपसे ठगी कोशिश की गई है लेकिन पैसा नहीं कटा है तो इस मामले में भी पुलिस शिकायत दर्ज करेगी. साइबर सेल को अलर्ट करने के साथ-साथ ठग के बैक अकाउंट को ब्लॉक कराएगी, लेकिन मुकदमा नहीं चलाया जाएगा.
