सुबह धुंध, दिन में गर्मी… यूपी के कई जिलों में पारा 35 डिग्री पार, फिर भी घने कोहरे की स्थिति क्यों?
यूपी में इस वक्त अधिकतम तापमान 35 डिग्री के पार दर्ज किया जा रहा है. ठंड की विदाई के साथ-साथ गर्मी भी आ चुकी है. लेकिन आज यानी 10 मार्च की सुबह प्रदेश के कई शहरों में सुबह के वक्त घना कोहरा देखा गया. मौसम में आई इस तब्दीली पर हर कोई हैरान है
मार्च का महीना चल रहा है. तापमान में भी लगातार इजाफा हो रहा है. यूपी पारा 35 डिग्री के पार दर्ज किया जा रहा है. लेकिन इस दौरान यूपी के कई शहरों के मौसम में सुबह के वक्त ऐसा बदलाव नजर आया, जिसे देख हर कोई चौंक गया. कोहरे के चलते विजिबिलिटी काफी कम हो गई. इससे सड़कों पर वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा. कई जगह चालक हेडलाइट और डीपर जलाकर धीरे-धीरे वाहन चलाते दिखे.
मौसम में आई इस तब्दीली पर हर कोई हैरान है. सबके मन में ये सवाल है कि जब ठंड जा चुकी है. गर्मी ने पूरी तरह से दस्तक दे दी है. प्रदेश में अधिकतम तापमान 38 डिग्री तापमान के पास दर्ज किया जा रहा है. दिन में तेज धूप खिल रही है, तो फिर सुबह के वक्त घने कोहरे की स्थिति कैसे दर्ज की जा रही है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक मार्च में कोहरे जैसे हालात बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं.
तापमान में अंतर के चलते हो सकता है ऐसा
मौसम विशेषज्ञ डॉ सुनील पांडे बताते है कि इसकी एक वजह रात और दिन के तापमान में अंतर होना भी हो सकता है. दिन में तेज गर्मी और रात में ठंडक होने के चलते हवा में नमी बढ़ जाती है. इससे सुबह धुंध बन सकती है. साथ ही जब हवा में प्रदूषण ज्यादा होता है तो धूल और स्मॉग के कण नमी के साथ मिलकर धुंध जैसी स्थिति बन जाती है. पश्चिमी विक्षोभ जैसी स्थितियां भी मौसम में नमी लाने का का काम करती हैं. यह नमी रात की ठंडी हवा से टकराती है, तो कोहरे जैसी स्थितियां बन जाती हैं. फिलहाल, हिमालयी क्षेत्र में एक पश्चिमी विक्षोभ जरूर सक्रिय है, जिसका असर मैदानी इलाकों पर पड़ रहा है.
रेडिएशन फॉग भी मुख्य वजह
डॉक्टर सुनील पांडे के मुताबिक इस समय कोहरा नजर आने के पीछे एक मुख्य कारण रेडिएशन फॉग (विकिरण कोहरा) भी है. दिन में तेज धूप पड़ने से धरती की सतह गर्म हो जाती है और वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ जाती है. रात में यदि आसमान साफ रहता है, तो धरती अपनी गर्मी तेजी से अंतरिक्ष में छोड़ देती है. इससे सतह के निकट हवा का तापमान अचानक गिर जाता है. ठंडी हवा नमी को संतृप्त रखने में असमर्थ हो जाती है, जिससे जलवाष्प छोटी-छोटी बूंदों में संघनित होकर कोहरा बनाता है. यह कोहरा सुबह के समय सबसे घना होता है और धीरे-धीरे सूर्य की गर्मी से बिखरता है.
हवा की कम गति के चलते भी होता है ऐसा
डॉक्टर सुनील पांडे ने आगे बताया कि हवा की कम गति या शांत मौसम होने पर कोहरा आसानी से बिखर नहीं पाता. हवा न होने से नमी और बूंदें सतह के निकट ही जमा रहती हैं. साथ ही, शहरों में मौजूद प्रदूषण के कण (Aerosols) कोहरा को और घना बनाते हैं. ये कण कंडेंसेशन न्यूक्लिई का काम करते हैं, जिन पर नमी आसानी से जम जाती है. परिणामस्वरूप कोहरा स्मॉग के रूप में बदल जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होता है. भारतीय मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में कोहरे की संभावना जताई है.
