10 साल बाद फैसला! माफिया अजय सिपाही को उम्रकैद, मंशाराम की गोली मारकर हुई थी हत्या

बहुचर्चित माफिया और पूर्व ब्लाक प्रमुख अजय सिंह 'सिपाही' और दो अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. अदालत ने सुलतानपुर के मंशाराम की गोली मारकर हुई थी हत्या मामले में यह फैसला सुनाया है. लगभग दस साल चले मुकदमे के बाद कोर्ट से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है.

माफिया अजय सिंह 'सिपाही' सहित 3 को हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा

अम्बेडकरनगर के बहुचर्चित माफिया और पूर्व ब्लाक प्रमुख अजय सिंह सिपाही सहित तीन लोगों को कोर्ट ने मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. साल 2016 में सुलतानपुर के मंशाराम की गोली मारकर हत्या हुई थी. लगभग दस साल चले मुकदमे के बाद एडीजे प्रथम राम विलास सिंह ने मामले में यह बड़ा फैसला सुनाया है.

एडीजे प्रथम राम विलास सिंह ने अजय प्रताप सिंह पुत्र चंद्रभान सिंह निवासी लोकनाथ पुर थाना महरुआ, मुलायम यादव पुत्र जगीराम निवासी किशुन पुर थाना दोस्तपुर, अजय यादव पुत्र राम चेत निवासी किशनागर पुर थाना दोस्तपुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने तीनों दोषियों को 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है.

दावत के बहाने घर बुलाकर कर दी हत्या

सुलतानपुर के मंशाराम की 23 मार्च, 2016 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. महरुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लोकनाथ पुर गांव निवासी अजय सिंह सिपाही के घर कोई पार्टी चल रही थी. इसी कार्यक्रम में सुलतानपुर के रहने वाले मंशाराम यादव भी हुए थे. इसी दौरान मंशाराम यादव की गोली मार कर हत्या कर दी गई और शव को ठिकाने लगा दिया गया.

हत्या के बाद मंशाराम के शव को सुल्तानपुर जिले के जयसिंह पुर थाना क्षेत्र में फेंक दिया था. दो दिन बाद जब शव मिला तो परिजनों ने महरुआ थाना में मुकदमा लिखवाया. जांच के दौरान पुलिस ने अजय सिंह सिपाही, मुलायम यादव और अजय यादव को अपराधिक षड्यंत्र रचते हुए घटना को अंजाम देने और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए चार्ज सीट दाखिल किया.

ग्राम प्रधान चुनाव की रंजिश के कारण हुई हत्या

पुलिस जांच और कोर्ट की सुनवाई के अनुसार, यह हत्या 2015 के ग्राम प्रधान चुनाव की रंजिश के कारण हुई थी. मुख्य आरोपी मुलायम यादव चुनाव हार गया था और उसे शक था कि मंशाराम ने विपक्षी उम्मीदवार का समर्थन किया था. कोर्ट ने अजय कुमार यादव को साजिशन हत्या का दोषी पाया, जो कटेहरी से पूर्व ब्लॉक प्रमुख और माफिया के तौर पर जाने जाते हैं.