क्या CM का समर्थन करने वाला ही शंकराचार्य? योगी के बयान पर अविमुक्तेश्वरानंद का सवाल
प्रयागराज प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद पर सीएम योगी ने चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता. कानून से ऊपर मैं भी नहीं हूं. सबको उन मर्यादाओं का पालन करना होगा. अब सीएम योगी के इस बयान पर अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार किया है.
18 फरवरी को मौनी अमावस्या के दिन स्नान को लेकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रयागराज प्रशासन के बीच विवाद हो गया. अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर उनसे बदलसलूकी करने और शिष्यों को पीटने का आरोप लगाया था. अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है.
हर कोई शंकराचार्य नहीं लिख सकता-CM
उत्तर प्रदेश विधान मंडल के बजट सत्र में शुक्रवार यानी 13 फरवरी को सीएम योगी ने कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता. हर व्यक्ति हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर के जहां-तहां वातावरण खराब नहीं कर सकता. कानून से ऊपर मैं भी नहीं हूं. सबको उन मर्यादाओं का पालन करना होगा.
अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी पर किया पलटवार
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी के बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को साधारण से तथ्य की जानकारी नहीं है कि 2015 में मैं शंकराचार्य नहीं था. वहीं, योगी आदित्यनाथ को महंत की गद्दी और मुख्यमंत्री का पद दोनों रिश्तेदारी की वजह से मिली हुई है.
बीजेपी जी हुजूरी करने वालो को शंकराचार्य देखना चाहती है
अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा जिस व्यक्ति को शंकराचार्य कहने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है, उसे सीएम योगी बार-बार शंकराचार्य कहते हैं. बीजेपी के लोग जी हुजूरी करने वाले को शंकराचार्य के रूप में देखना चाहते हैं. क्या सीएम योगी का समर्थन करने वाले लोगों को ही शंकराचार्य माना जाएगा.
अविमुक्तेश्वरानंद ने किया ये दावा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उन्हें किसी और के मान्यता देने या ना देने का सवाल ही नहीं उठता है. मुझे बाकी तीनों पीठ के शंकराचार्यों ने ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में मान्यता देकर पट्टाभिषेक कराया है. अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार पर ब्राह्मणों को टार्गेट करने का भी आरोप लगाया है.
अखिलेश ने भी योगी पर किया पलटवार
सीएम योगी का शंकराचार्य को लेकर दिए बयान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि‘पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’, पर उसकी वाणी पोल खोले. उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी. ऐसा करने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा, जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं.
