‘घूसखोर पंडत’ के बहाने कैसे सियासी फायदे की तलाश में हैं बीजेपी और बीएसपी?

'घूसखोर पंडत' वेब सीरीज पर बवाल मचा हुआ. लखनऊ में इस सीरीज के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है. उधर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इसे जातिसूचक बताते हुए बैन की मांग की है. ऐसे में माना जा रहा है कि बसपा और बीजेपी दोनों ही पार्टियां 'घूसखोर पंडत' के बहाने सियासी फायदे की तलाश कर रही हैं.

मायावती और सीएम योगी Image Credit:

मनोज बाजपेयी अभिनीत वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज होने से पहले ही कंट्रोवर्सी में फंस गई है. फिल्म के टाइटल को लेकर देशभर के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हो गई है. लखनऊ के हजरतगंज थाने में तो इस सीरीज के निर्देशक रितेश शाह और उनकी टीम के खिलाफ समाज में सौहार्द खराब करने , जातिगत भावनाएं आहत करने और शांति भंग के प्रयास में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. अब बसपा सु्प्रीमों ने इस वेब सीरीज के टाइटल को लेकर प्रतिक्रिया दी है.

मायावती ने वेब सीरीज को बैन करने की मांग की

मायावती ने अपने X अकाउंट पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि ‘यह बड़े दुख और चिंता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यूपी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है, उसको लेकर समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है. इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निंदा करती है. इस जातिसूचक फिल्म पर केंद्र सरकार को तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए. बीएसपी की यह मांग है.

पिछले जो विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन बद से बदतर होते गया. समाज के जिन तबकों को मायावती का वोटबैंक माना जाता रहा है, वह भी उनसे खिसक चुका है. इस दौरान मायावती राजनीतिक तौर पर कम सक्रिय भी दिखीं. लेकिन पिछले 5 महीने से मायावती फिर से यूपी के पॉलिटिक्स में एक्टिव होते दिख रही हैं. लखनऊ में एक विशाल रैली भी कर चुकी हैं. इसमें वह अपने पुराने तेवर में दिखीं. इस दौरान उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर जमकर हमला बोला. उन्होंने बसपा को ब्राह्मणों की सबसे हितैषी पार्टी करार दिया था.

मायावती फिर से दोहराना चाहती हैं 2007 का इतिहास

मायावती ब्राह्मणों को बसपा के साथ जोड़कर सरकार बनाने का एक्सपेरिमेंट कर चुकी हैं. वह फिर से साल 2007 का इतिहास दोहराना चाहती हैं. उनका यह प्रयोग “सोशल इंजीनियरिंग” के नाम से मशहूर हो गया था, जिसमें दलित के ब्राह्मणों के वोटबैंक को उन्होंने कैश करने की कोशिश की थी और सफल रही थीं. अब 19 साल बाद मायावती एक बार फिर से सोशल इंजीनियरिंग के इस फ़ॉर्मूले को आजमाने की कोशिश में हैं. यही वजह है कि जब यूजीसी के नए नियमों का सर्वण समाज विरोध कर रहा था और कोर्ट ने उसपर स्टे लगाया तो मायावती ने बीच का रास्ता अपनाया. उन्होंने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया था. इसके अलावा सर्वण समाज के आंदोलन के खिलाफ भी वह ज्यादा मुखर नहीं दिखी थीं.

फिर सफल होगा मायावती का सोशल इंजीनियरिंग वाले फॉर्मूला?

अब ‘घुसखोर पंडत’ वेब सीरीज के टाइटल पर उनकी प्रतिक्रिया इस बात की ओर इशारा कर रही है कि मायावती एक बार फिर अपने सबसे सफल 2007 के सोशल इंजीनियरिंग वाले फॉर्मूले को अपनाना चाह रही है. क्या पता उनकी इस रणनीति से बसपा को उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई राजनैतिक जमीन वापस मिल जाए.

बीजेपी से अधिक खुश नहीं है ब्राह्मण समाज

इधर खबर है कि ब्राह्मण समाज बीजेपी से भी बहुत अधिक खुश नहीं है. दरअसल, जब लखनऊ में ब्राह्मण विधायकों की मीटिंग हुई थी तो बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने चेतावनी जारी की थी. फिर बीजेपी पर इस मुद्दे को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा था. इससे पहले क्षत्रिय और कुर्मी विधायक भी इस तरीके का आयोजन कर चुके थे. लेकिन उनको किसी तरह की कोई भी चेतावनी नहीं दी गई थी. ऐसे में ब्राह्मण समाज को बीजेपी का सिर्फ उनके समुदाय के विधायकों को चेतावनी देना बेहद नागवार गुजरा. हालांकि, बीजेपी ने किसी तरह से इस मुद्दे पर उपजी ब्राह्मणों की नाराजगी को संभालने की कोशिश की थी. लेकिन यूजीसी के नए नियमों ने इस कोशिश को सफल नहीं होने दिया.

यूजीसी के नियमों ने और बढ़ाई ब्राह्मणों की नाराजगी

यूजीसी के नए नियमों का सर्वण समाज के साथ-साथ ब्राह्मण समुदाय ने भी भरपूर विरोध किया. इन नियमों के खिलाफ देशभर में सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में हुआ. केंद्र सरकार पर एकतरफा कानून बनाने का आरोप लगा. इससे ब्राह्मण विधायकों की मीटिंग पर चेतावनी से उपजी नाराजगी यूजीसी के नए नियमों के जारी होने से अलग स्तर पर पहुंच गई.

घुसखोर पंडत’ के बहाने सियासी फायदे की तलाश में बीजेपी

ऐसे में माना जा रहा है लखनऊ में ‘घुसखोर पंडत’ वेबसीरीज के निर्देशक और उनकी टीम पर दर्ज किया गया मुकदमा बीजेपी की तरफ से ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की एक कोशिश है. बीजेपी को लगता है कि अगर ब्राह्मण समाज उनसे नाराज होता है तो विधानसभा चुनावों में भारी नाराजगी हो सकती है. यही वजह है कि ‘घुसखोर पंडत’ के बहाने बीजेपी अपने सियासी फायदे की तलाश कर रही है.

वेब सीरीज पर ब्राह्मण को अपमानित करने का आरोप

बता दें ‘घूसखोर पंडत’ वेबसीरीज नेटफ्लिक्स पर रिलीज की जानी है. इस सीरीज पर आरोप लग रहा कि इसका शीर्षक ब्राह्मण समाज को टार्गेट कर अपमानित करने के उद्देश्य से रखा गया है. इसको लेकर ब्राह्मण संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कर दी है. संगठनों ने इस सीरीज के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है.

विक्रम सिंह, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली हजरतगंज ने खुद संज्ञान लेते हुए इस सीरीज के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. विक्रम सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टतया ऐसा लग रहा है कि डायरेक्टर और उनकी टीम समाज में वैमनस्यता फैलाने, शांति व्यवस्था भंग करने और सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से इस सीरीज को प्रसारित करने जा रही है. ऐसे में तथ्यों एवं संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए सीरीज के डायरेक्टर और उनकी टीम के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई है.