कांग्रेस से इस्तीफे के बाद साइकिल की सवारी करेंगे नसीमुद्दीन, कई बड़े नेता भी बनेंगे सपाई

नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब समाजवादी पार्टी जॉइन करने वाले हैं. उन्हें खुद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव 15 फरवरी को पार्टी में शामिल कराएंगे. इस दौरान उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी भी मिलने की संभावना है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दिग्गज नेता पूर्व में बसपा में थे और उन्हें बसपा सुप्रीमो मायावती का दाहिना हाथ कहा जाता था.

नसीमुद्दीन सिद्दीकी

कांग्रेस पार्टी से इस्तीफे के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब समाजवादी पार्टी जॉइन करने वाले हैं. उन्हें खुद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव 15 फरवरी को पार्टी में शामिल कराएंगे. इस दौरान उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी भी मिलने की संभावना है. बुंदेलखंड के दिग्गज नेता पूर्व में बसपा में थे और उन्हें बसपा सुप्रीमो मायावती का दाहिना हाथ कहा जाता था. बाद में उन्होंने बसपा छोड़कर कांग्रेस का चोला ओढ़ लिया था, लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी से भी उनका मोह भंग हो गया था.

माना जा रहा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी को सपा में शामिल कराकर अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ी और मजबूत बढ़त हासिल कर सकते हैं. खासकर पश्चिमी यूपी में, जहां सिद्दीकी का प्रभाव मजबूत है. बसपा छोड़कर कांग्रेस में आए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने जनवरी 2026 में ही कांग्रेस से इस्तीफा दिया था. उनके साथ 73 वरिष्ठ नेता, जिनमें कई पूर्व विधायक और पश्चिमी यूपी, दिल्ली तथा उत्तराखंड के नेता भी शामिल थे, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी थी.

कांग्रेज पार्टी पर लगाया था आरोप

सिद्दीकी ने अपने इस्तीफे के बाद कहा था कि कांग्रेस में उन्हें ग्राउंड लेवल पर काम करने का मौका नहीं मिल रहा था. वह एक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहना चाहते हैं. उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व का सम्मान करते हुए भी प्रदेश स्तर पर खुद को नजरअंदाज महसूस करने की बात कही. सिद्दीकी का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. वह मूल रूप से बहुजन समाज पार्टी के प्रमुख नेता थे और मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं.

बसपा ने फिर दिया था ऑफर

2017 में बसपा से निष्कासित होने के बाद उन्होंने 2018 में कांग्रेस जॉइन की थी. जहां उन्होंने यूपी विधान परिषद में नेता विपक्ष की भूमिका भी निभाई. हालांकि, कांग्रेस में उनकी भूमिका सीमित रहने से वह असंतुष्ट थे. उनके इस्तीफे के बाद बसपा, सपा और आजाद समाज पार्टी से उन्हें ऑफर मिले थे, लेकिन अब सपा में शामिल होने की खबर पक्की मानी जा रही है. सपा में उनके शामिल होने से पार्टी को मुस्लिम वोट बैंक मजबूत करने में मदद मिलेगी.