अफसरों का इस्तीफा और UP में ब्राह्मण vs ठाकुर! UGC के तूफान को कैसे रोकेगी योगी सरकार?
योगी सरकार दो मुद्दों पर बुरी तरह घिरी हुई है. पहला- UGC नियमों पर BJP के अंदर ही विरोध और दूसरा- PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री और GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा, जिसने ब्राह्मण बनाम ठाकुर की सियासत को हवा दे दी है. इन दोनों मुद्दों ने 2027 चुनाव से पहले योगी सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस समय दो मुद्दों पर बुरी तरह घिर गई है. पहला- एक के बाद एक हो रहे अफसरों के इस्तीफे और दूसरा- यूजीसी के नए नियम को लेकर बीजेपी के अंदर ही हो रहा विरोध. इसके साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री और डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे ने यूपी में ठाकुर बनाम ब्राह्मण की पुरानी सियासत को हवा दे दी है. अब सवाल उठता है कि योगी सरकार आखिर इस तूफान को कैसे रोक पाएगी?
सबसे पहले बात करते हैं अफसरों के इस्तीफे की.
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को इस्तीफा देते हुए योगी सरकार पर ‘एंटी-ब्राह्मण’ अभियान चलाने का आरोप लगाया. उन्होंने यूजीसी के नए नियमों और प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान और उनके शिष्यों के साथ कथित बदसलूकी का जिक्र किया. अभी यह मामला ठंडा भी हुआ था कि अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया. प्रशांत सिंह ने योगी सरकार के समर्थन में नौकरी छोड़ी है.
UP में ब्राह्मण vs ठाकुर!
यूपी में ब्राह्मण बनाम ठाकुर की राजनीति पुरानी है, जिसे अलंकार अग्निहोत्री और प्रशांत सिंह के इस्तीफे ने एक बार फिर हवा दे दी है. योगी सरकार में गाहे-बगाहे ब्राह्मण विधायक और नेता कभी खुलकर तो कभी दबी जुबान में विरोध जता रहे हैं. ब्राह्मणों को लगता है कि ठाकुरों को ज्यादा तवज्जो मिल रही है. यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान बीजेपी के कुछ ब्राह्मण विधायकों ने लखनऊ में एक बैठक भी की थी. इस बैठक के बाद सियासी भूचाल आ गया था.
बैठक से विपक्षी दलों को मौका मिला और सवालों के घेरे में योगी सरकार आ गई. इसके बाद ब्राह्मण विधायकों को बकायदा चेतावनी वाला नोटिस दे दिया गया. इससे माहौल और गर्मा गया. आरोप लगा कि भाजपा ब्राह्मण विरोधी है. इससे पहले जब ठाकुर विधायकों नें कुटुम्ब के नाम पर बैठकें की, तब कोई नोटिस नहीं दिया गया. यह विवाद पूरी तरह से शांत भी नहीं हुआ था कि माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान का विवाद उठ गया.
ब्राह्मण बटुकों के साथ मारपीट पर योगी सरकार की फजीहत
माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रयागराज प्रशासन के बीच बहस, नोक झोंक और ब्राह्मण बटुकों के साथ मारपीट का मुद्दा सियासी रुप लेने लगा. शंकराचार्य अभी धरने पर बैठे हैं. उनके लिए समर्थन का दायरा बढ़ता जा रहा है. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इसी मुद्दे पर अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया है. सरकार पर सवाल उठ रहे है. विवाद बढ़ता जा रहा है और बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. इसी बीच यूजीसी का मुद्दा भी आ गया है.
यूजीसी के विरोध में पार्टी छोड़ रहे हैं भाजपाई
यूजीसी के नए नियम का मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना है, लेकिन सवर्ण समाज इसके विरोध में है. उनका दावा है कि इससे झूठे आरोपों का खतरा बढ़ेगा और सामान्य वर्ग के छात्रों को निशाना बनाया जाएगा. लखनऊ यूनिवर्सिटी से लेकर दिल्ली यूजीसी मुख्यालय तक प्रदर्शन हो रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर हो चुकी है, जिसमें नियम 3(सी) को असंवैधानिक बताया गया. यूपी में बीजेपी के कई नेता भी पार्टी छोड़ चुके हैं.
योगी सरकार इस तूफान को रोकने के लिए क्या कर सकती है?
अब योगी सरकार की कोशिश है कि यूजीसी नियमों पर स्पष्ट स्पष्टीकरण जारी कर भ्रम दूर किया जाए. कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पहले ही कहा है कि एतराज वाले सुप्रीम कोर्ट जाएं. योगी सरकार के एक और मंत्री नरेंद्र कश्यप ने यूजीसी के नए नियमों का समर्थन किया है. हालांकि, अभी तक जिन दोनों मंत्रियों ने बयान जारी किया है, वह ओबीसी समाज से आते हैं. इस मुद्दे पर अभी सवर्ण समाज के मंत्री और बड़े नेताओं ने चुप्पी साधे रखी है.
भाजपा विद्रोह को कैसे रोकेगी?
बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने यूजीसी के नए नियम का खुलकर विरोध किया है. बीजेपी के अंदर इस मुद्दे पर गहरी चिंता है. वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सवर्ण वोट बैंक में दरार पड़ सकती है. पार्टी इसे रोकने के लिए सक्रिय हो गई है. झारखंड से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर आश्वासन दिया कि ‘मोदी जी ऊपरी जातियों के बच्चों का कोई नुकसान नहीं होने देंगे’ और गलतफहमियां जल्द दूर की जाएंगी.
पार्टी नेताओं से बात कर रहा है हाईकमान
उत्तर प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘सवर्ण जातियों की एकजुटता को कम आंकना गलती होगी… अगर ये नियम वापस नहीं लिए गए तो पार्टी को नुकसान झेलना पड़ सकता है… पार्टी हाईकमान अब पदाधिकारियों से बातचीत करके स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है.’
ब्राह्मण vs ठाकुर पर क्या कर रही है सरकार?
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘सरकार को ब्राह्मण नेताओं से डायलॉग शुरू करना चाहिए.’ इस बीच चर्चा है कि यूपी में मंत्रिमंडल में फेरबदल होना वाला है, जिसमें ब्राह्मणों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर असंतोष शांत किया जाएगा. जैसे ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर नोटिस जारी होने के बाद बीजेपी ने रमापति राम त्रिपाठी को मैदान में उतारा था, वैसे ही किसी बड़े ब्राह्मण नेता को मौजूदा नैरेटिव तोड़ने के लिए मैदान में उतारा जा सकता है.