मुरादाबाद में वक्फ संपत्तियों पर बड़ा संकट, 316 प्रस्ताव निरस्त…कब्जेदारों के पास अब क्या है विकल्प?
मुरादाबाद में खारिज किए गए वक्फ की संपत्तियों में से सुन्नी वक्फ बोर्ड की 241 संपत्तियां और शिया वक्फ बोर्ड की 75 संपत्तियां शामिल हैं. इन संपत्तियों में मस्जिदें, ईदगाह, कब्रिस्तान और अन्य धार्मिक स्थल मुख्य रूप से शामिल हैं. जानिए अब इन कब्जेदारों के पास आखिरी विकल्प क्या है.
मुरादाबाद जनपद में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है. डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बढ़ते हुए सरकार द्वारा पहली बार ‘उम्मीद’ पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों का व्यापक सत्यापन अभियान चलाया गया था. इस प्रक्रिया के दौरान जनपद की कुल 2671 वक्फ संपत्तियों की गहन जांच की गई थी. इसमें से दस्तावेजों की कमी और तकनीकी खामियों के चलते 316 प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया गया है.
जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मुरादाबाद में सुन्नी वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 2545 और शिया वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 126 संपत्तियां पंजीकृत हैं. इस सत्यापन प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को त्रुटिहीन बनाना और अवैध कब्जों या गलत प्रविष्टियों पर अंकुश लगाना है. सत्यापन को लेकर कई मामलों में कब्जेदारों द्वारा पोर्टल पर कागजात सही तरीके से अपलोड नहीं किए गए या फिर निर्धारित मानक प्रारूप का पालन नहीं किया गया है, जिसके की वजह से निरस्तीकरण की कार्रवाई की गई है.
संबंधित पक्षों को दिया गया एक और मौका
प्रशासन ने अब उन सभी संबंधित पक्षों को एक अंतिम अवसर प्रदान किया है जिनके प्रस्ताव खारिज हुए हैं, ताकि वे अपनी संपत्तियों के स्वामित्व और विवरण से जुड़े साक्ष्यों को सुधार कर फिर प्रस्तुत कर सकें. यह कदम जनपद में वक्फ संपत्तियों के डिजिटल डेटाबेस को इकठ्ठा करने के लिए उठाया गया है. मुरादाबाद में खारिज किए गए संपत्तियों में से सुन्नी वक्फ बोर्ड की 241 संपत्तियां और शिया वक्फ बोर्ड की 75 संपत्तियां शामिल हैं. इन संपत्तियों में मस्जिदें, ईदगाह, कब्रिस्तान और अन्य धार्मिक स्थल मुख्य रूप से शामिल हैं.
फिर से उम्मीद पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने का निर्देश
जांच के दौरान यह पाया गया कि 15 फरवरी तक जमा किए गए दस्तावेजों में से कई अधूरे थे. उनमें कुछ गंभीर और तकनीकी कामिया थीं. शासन की तरफ से निर्धारित मानक प्रारूप का उल्लंघन भी इन प्रस्तावों के निरस्त होने की एक बड़ी वजह बना है. अब मुतवल्लियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने दस्तावेजों में आवश्यक संशोधन करें. उन्हें दोबारा ‘उम्मीद’ पोर्टल पर सावधानीपूर्वक अपलोड करें. सत्यापन की प्रक्रिया को समय रहते सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सके है.
5 जून तक संबंधित पक्ष कर लें सुधार
प्रशासन ने इस सुधार प्रक्रिया के लिए 5 जून की अंतिम समयसीमा निर्धारित की है. विभाग की ओर से ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्धारित तिथि तक त्रुटियों को ठीक कर पोर्टल पर दोबारा जानकारी साझा नहीं की गई है, तो भविष्य में संबंधित मुतवल्लियों को गंभीर कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है.
पोर्टल बंद होने के बाद डेटा में नहीं होगा बदलाव
पोर्टल बंद होने के बाद डेटा में किसी भी प्रकार का बदलाव संभव नहीं होगा, जिससे संपत्तियों की वैधता पर संकट आ सकता. सभी पक्षों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना जल्द से जल्द अपने प्रामाणिक दस्तावेजों का मिलान कर उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित करें.
