नोएडा हिंसा के पीछे बड़ी साजिश! CM द्वारा बनाई कमेटी का बड़ा खुलासा, अब होगा एक्शन
नोएडा हिंसा के पीछे एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित कमेटी ने बताया कि बाहरी तत्वों ने मजदूरों को उकसाया और औद्योगिक शांति भंग करने का प्रयास किया. न्यूनतम वेतन वृद्धि की अफवाह ने भी आग में घी डाला. श्रमिकों की कुछ जायज मांगें हैं, लेकिन इन्हीं मांगों की आड़ में हिंसा फैलाई गई. अब ऐसे अराजकता फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी.
राष्ट्रीय राजधानी से सटे नोएडा में सोमवार को हुए मजूदरों के हिंसक प्रदर्शन के पीछे एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है. इस साजिश के तहत जानबूझकर मामला वर्कर्स बनाम इंडस्ट्री और वर्कर्स बनाम सरकार बनाया गया. एक सोची समझी साजिश के तहत कुछ लोगों ने मजदूरों को उकसाया और हिंसा कराया. यह खुलासा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने किया है. ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सभागार में मंगलवार को प्रेसकांफ्रेंस में कमेटी के सदस्यों ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी.
कमेटी ने अपने जांच के आधार पर बताया कि आखिर कैसे एक सामान्य प्रदर्शन अचानक हिंसक रूप ले बैठा, कमेटी ने साफ किया कि श्रमिकों की कुछ मांगे जायज थी. इन मांगों पर विचार किया जाना चाहिए, लेकिन इन्हीं मांगों की आड़ में कुछ अराजक तत्वों ने माहौल बिगड़ने की पूरी कोशिश की. कमेटी के सदस्य आलोक कुमार ने कहा कि नोएडा में श्रमिकों का प्रदर्शन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से हिंसक हो गया जो नहीं होना चाहिए था.
बाहरी तत्वों ने बिगाड़ा माहौल
आलोक कुमार ने अपनी जांच और इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर बताया कि मजदूरों में कुछ बाहरी तत्व घुस आए थे. इन बाहरी और अराजक तत्वों ने आंदोलन को भड़काने में बड़ी भूमिका निभाई. इसके पीछे इन अराजक तत्वों की साजिश थी कि प्रदेश में औद्योगिक विकास को लेकर बने सकारात्मक माहौल को खराब किया जाए. इनके लिए जानबूझ कर इस विवाद को वर्कर्स बनाम इंडस्ट्री और वर्कर्स बनाम सरकार का रंग दिया गया. ऐसे कुछ लोगों की पहचान कर ली गई है. बाकियों की भी पहचान की जा रही है. किसी को बक्सा नहीं जाएगा.
सूचना संकट से बड़ा हुआ मामला
इस मौके पर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि सीएम योगी के निर्देश पर गठित इस कमेटी में उद्योग विभाग, श्रम विभाग, जिला प्रशासन और तीनों प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हैं. कमेटी ने दोनों पक्षों श्रमिकों और उद्योगपतियों से अलग-अलग बातचीत की है. समस्या का सही और त्वरित समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि इस मामले को बड़ा बनाने में अहम भूमिका मिस इनफॉरमेशन यानी गलत जानकारी है.
अफवाह की अहम भूमिका
एक अफवाह फैलाई गई कि भारत सरकार ने न्यूनतम वेतन 20 हजार कर दिया है और राज्य सरकार ने भी इसे मंजूरी दे दी है. लेकिन उद्योगपति इसे लागू नहीं कर रहे हैं. इस गलत जानकारी के आधार पर श्रमिकों में असंतोष बढ़ा और प्रदर्शन तेज हो गया. उन्होंने स्पष्ट किया की वास्तविकता यह है कि न्यूनतम वेतन तय करने की प्रक्रिया अभी जारी है और इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है.
हरियाणा की चिंगारी, यूपी में बनी शोला
अधिकारियों के मुताबिक अफवाह हरियाणा में गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्र आईएमटी मानेसर में उड़ी थी. इस चिंगारी ने देखते ही पूरे एनसीआर को अपने लपेटे में ले लिया. यूपी में तो यह चिंगारी शोला ही बन गई. स्थिति ऐसी बन गई कि पूरे एनसीआर में श्रमिकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई और कई जगहों पर प्रदर्शन शुरू हो गए. कमेटी ने बताया कि श्रमिकों से बातचीत की गई तो उन्होंने साफ तौर पर मांग रखी कि महंगाई बढ़ने के कारण वेतन बढ़ना चाहिए. श्रमिकों की यह मांग जायज है. उनसे बातचीत में साफ हो गया कि वह हिंसा के पक्ष में नहीं थे. वह तो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे.
