जातीय जनगणना की ढाल, आरक्षण के अंदर आरक्षण का सवाल… अखिलेश कैसे करेंगे BJP के नैरेटिव का काउंटर

अखिलेश यादव ने बीजेपी के महिला आरक्षण बिल नैरेटिव को तोड़ने की तैयारी में है. सपा पिछड़ी, दलित और अल्पसंख्यक महिलाओं को आगे लाकर यह संदेश देगी कि बिल अधूरा है. अखिलेश का तर्क है कि बिना जातीय जनगणना यह बिल केवल सामान्य वर्ग के लिए है, और बीजेपी परिसीमन से सत्ता बचाना चाहती है.

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (फाइल फोटो) Image Credit: PTI

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल को लेकर बीजेपी के आक्रामक रुख के खिलाफ पूरी रणनीति तैयार कर ली है. सपा अब पिछड़ी, दलित और अल्पसंख्यक महिलाओं को आगे करके बीजेपी के ‘महिला सशक्तिकरण’ वाले नैरेटिव को तोड़ने की तैयारी में है. अखिलेश यादव जातीय जनगणना और ‘आरक्षण के अंदर आरक्षण’ के मुद्दे को ढाल बनाकर विपक्षी हमला बोलने वाले हैं.

सपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की ओर से पिछड़ी और दलित जातियों से आने वाली महिलाओं को विशेष रूप से प्रोजेक्ट किया जाएगा. इन महिलाओं को मंच पर लाकर यह संदेश दिया जाएगा कि बीजेपी का महिला आरक्षण बिल असल में सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए है, जबकि पिछड़ी, दलित और अल्पसंख्यक महिलाओं के हितों की अनदेखी की जा रही है.

प्लान साफ, जनता के बीच दो बड़े सवाल उठाना

अखिलेश यादव इस मुद्दे पर लगातार कह रहे हैं कि बिना जातीय जनगणना के महिला आरक्षण बिल अधूरा’ है. सपा का प्लान साफ है, जनता के बीच दो बड़े सवाल उठाना. अखिलेश यादव जनसभा में बार-बार यह बात रखने वाले हैं कि जब 2023 में ही संविधान संशोधन बिल पास हो चुका था, तो अचानक अब इसे लेकर इतना शोर क्यों?

अखिलेश यादव का आरोप है कि बीजेपी इसे परिसीमन (delimitation) के जरिए सत्ता बचाने का हथियार बनाना चाहती है. सपा का दावा है कि बीजेपी महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन कराकर असम मॉडल लागू करना चाहती है, जिससे उसकी सत्ता बनी रहे. अखिलेश यादव खुलकर कह रहे हैं, समाजवादी पाार्टी बीजेपी को ऐसा करने नहीं देगी.

RSS पर भी सीधा हमला बोलने का फैसला

इसके अलावा अखिलेश ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी सीधा हमला बोलने का फैसला किया है. उन्होंने कई बार यह सवाल उठाया है कि बीजेपी हमें बताए कि संघ में कितनी महिलाएं हैं? अखिलेश का तर्क है कि जो संगठन खुद महिलाओं को नेतृत्व नहीं देता, वह देश की महिलाओं के आरक्षण पर इतना बड़ा नैरेटिव कैसे चला रहा है?

सपा की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि पार्टी कार्यकर्ता हर जिले में पिछड़ी और दलित महिला कार्यकर्ताओं को आगे लाएंगे. इन महिलाओं के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर यह मैसेज पहुंचाया जाएगा कि महिला आरक्षण तभी सार्थक होगा जब उसमें OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग आरक्षण का प्रावधान हो.

अखिलेश का दोहरा हमला, बीजेपी के लिए मुश्किल

राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार मान रहे हैं कि अखिलेश यादव का यह दोहरा हमला. जातीय जनगणना + आरक्षण के अंदर आरक्षण बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है. खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां पिछड़ी जातियां और दलित वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाते हैं. अभी तक बीजेपी महिला आरक्षण को ‘मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि’ बता रही है, लेकिन अखिलेश यादव इसे ‘चुनावी जुमला’ करार देने की तैयारी में हैं.

सपा के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि अखिलेश ने इस पूरे प्लान पर अपनी टीम के साथ विस्तृत चर्चा कर ली है और अगले कुछ दिनों में इसे सार्वजनिक रूप से शुरू भी कर दिया जाएगा. क्या अखिलेश का यह काउंटर भाजपा के महिला आरक्षण नैरेटिव को बेअसर कर पाएगा?

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