एक पेनड्राइव, कई सबूत… इस्तीफा देने वाले सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की मुश्किलें बढ़ेंगी!

बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. दरअसल, अपने इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने कलेक्ट्रेट पर हंगामा किया था, जिसकी वीडियोग्राफी कराई गई थी, जो अब साक्ष्य के रूप में शासन को भेजी गई है. इसमें नारेबाजी, प्रदर्शन और सरकारी कामकाज में बाधा से जुड़े सबूत शामिल हैं.

अलंकार अग्निहोत्री (फाइल फोटो)

बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं. इस मामले में जिला प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी है. इस रिपोर्ट के साथ एक पेनड्राइव भी भेजी गई है, जिसमें कई वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं. इन्हीं सबूतों के आधार पर शासन स्तर से अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ आरोपपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. बीते दिनों ही अलंकार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

बताया जा रहा है कि 26 जनवरी को सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान और UGC के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया था. फिर शासन ने उसी दिन अलंकार को सिटी मजिस्ट्रेट पद से निलंबित कर दिया था. हालांकि अब तक उनके खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र जारी नहीं हुआ है. शासन की ओर से नामित बरेली के जांच अधिकारी मंडलायुक्त हैं, लेकिन उनके पास भी अभी तक आरोप पत्र नहीं पहुंचा है.

इस्तीफे के बाद बढ़ा विवाद

26 जनवरी को कलक्ट्रेट में आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने सिटी मजिस्ट्रेट पद से अपना इस्तीफा भेज दिया था. उन्होंने यह इस्तीफा ई-मेल के जरिए राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजा था. इस्तीफे में उन्होंने यूजीसी के नए नियमों और प्रयागराज में शंकराचार्य व उनके शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया था. इस्तीफा भेजने के बाद अलंकार ने उसी दिन उसे सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दिया.

इसके बाद उनका रुख काफी आक्रामक हो गया. इतना ही नहीं उन्होंने और उनके समर्थकों ने सरकार के खिलाफ खुलकर बयानबाजी शुरू कर दी. इस दौरान प्रशासन के कई बड़े अफसरों ने अलंकार को मनाने की नाकाम कोशिश की थी. अगले दिन यानी 27 जनवरी को भी उन्होंने कलक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी और प्रदर्शन किया. बताया जाता है कि इस दौरान जिला प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी करवाई थी, जो अब साक्ष्य के रूप में शासन को भेजी गई है.

आरोपपत्र जारी होने की तैयारी

जिला प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भेजी गई पेनड्राइव में कई वीडियो क्लिप हैं, जिनमें नारेबाजी, प्रदर्शन और सरकारी कामकाज में बाधा से जुड़े सबूत शामिल हैं. इन्हीं के आधार पर शासन स्तर से आरोपपत्र जारी किया जाएगा. निलंबन के बाद अलंकार अग्निहोत्री को शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया था, लेकिन अभी तक उन्होंने वहां जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है. इसे भी जांच में एक अहम बिंदु माना जा रहा है.

दिल्ली कूच की घोषणा और सियासी बयान

फिलहाल, पूर्व पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री लगातार सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों से संपर्क में हैं. उनके व्हाट्सएप स्टेटस के मुताबिक, वह रविवार को वाराणसी पहुंचे थे, जहां उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने सात फरवरी को दिल्ली कूच करने की घोषणा की है. सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे उन्होंने व्हाट्सएप स्टेटस पर लिखा कि सत्ता परिवर्तन के लिए दिल्ली कूच किया जाएगा.

कोर्ट जाने के संकेत

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने निलंबन के खिलाफ न्यायालय जाने का मन बना लिया है. सोमवार को वह प्रयागराज पहुंचे और इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ अधिवक्ताओं से मुलाकात की. इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी लीगल टीम निलंबन से जुड़े नोटिस का अध्ययन कर रही है. आगे की रणनीति इसी के बाद तय की जाएगी. हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि वह अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे.

इस दौरान उन्होंने एससी-एसटी कानून को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए और मांग की कि छह फरवरी तक इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाया जाए. उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो सात फरवरी को दिल्ली कूच किया जाएगा.फिलहाल उन्होंने किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ने से इनकार किया है. पूरे मामले पर शासन और प्रशासन की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में अलंकार अग्निहोत्री की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.