होमगार्ड भर्ती में आयु-सीमा छूट अचानक क्यों हटाया? हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को किया तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने होमगार्ड भर्ती में 3 साल की आयु-सीमा छूट अचानक समाप्त करने पर सवाल उठाया है. अदालत ने यूपी सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब तलब किया. कोर्ट में याचिकाकर्ता ने भर्ती प्रक्रिया के बीच नियमों में बदलाव को अन्यायपूर्ण बताया है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को होमगार्ड अभ्यर्थियों को आयु-सीमा में मिली छूट वापस लेने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई की. इसमें बताया गया कि यूपी सरकार ने होमगार्ड भर्ती में 3 साल की आयु-सीमा छूट देने का ऐलान किया था, लेकिन अब अचानक इसे वापस ले लिया गया. सरकार का यह फैसले मनमाना और असंवैधानिक है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस विकास बुधवार की एकलपीठ ने इस मामले में यूपी सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से जानकारी मांगा है. अदालत में सरकार के इस फैसले के खिलाफ शिवम सिंह समेत 22 अन्य लोगों ने याचिका दायर की थी. याचिका में बताया कि सरकार ने निर्णय पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, इसे अचानक वापस लेना अन्याय है.
अभ्यर्थियों के आवेदन के बाद फैसला वापस क्यों?
याचिकाकर्ता ने कहा कि मामला 32,679 सिपाही एवं समकक्ष पदों की सीधी भर्ती से जुड़ा है. राज्य सरकार ने दिनांक 05 जनवरी 2026 को होमगार्ड श्रेणी के अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया था,. इस निर्णय के बाद बड़ी संख्या में होमगार्ड अभ्यर्थियों ने आवेदन प्रक्रिया पूरी की.
लेकिन 22 जनवरी को भर्ती बोर्ड ने अचानक आयु-सीमा छूट को समाप्त कर दिया, जिससे अनेक होमगार्ड अभ्यर्थी के आवेदन अयोग्य हो गये. कहा गया कि जब सरकार पहले ही आयु-सीमा में छूट देने का निर्णय ले चुकी है और अभ्यर्थियों ने उसी आधार पर आवेदन भी कर दिया तो भर्ती बोर्ड द्वारा अचानक उस छूट को समाप्त करना मनमाना और असंवैधानिक है.
इस प्रकार का बदलाव अभ्यर्थियों के साथ अन्याय
अदालत में दलील दी गई कि भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों में इस प्रकार का बदलाव अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है. ऐसे निर्णय अभ्यर्थियों के वैध अधिकारों का हनन करता है. साथ ही कोर्ट से भर्ती बोर्ड के इस निर्णय को निरस्त करने की मांग की. मामले में कोर्ट ने जवाब तलब किया है. हाईकोर्ट में याचिकाओं पर अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी.
