बागपत: रटौल नगर पंचायत अध्यक्ष का निर्वाचन रद्द, शपथ पत्र में छिपाए थे आपराधिक इतिहास
बागपत के एक नगर पंचायत चेयरमैन का चुनाव कोर्ट ने शून्य घोषित कर दिया है. याचिका में आरोप लगाया गया था कि जीते हुए उम्मीदवार के नामांकन पत्र में जरूरी तथ्यों को छिपाया गया था. अब याचिकाकर्ता और दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी के नगर पंचायत चेयरमैन बनने की संभावना जताई जा रही है.
बागपत की अपर जिला न्यायाधीश कोर्ट ने रटौल नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव शून्य घोषित किया है. निर्वाचित अध्यक्ष के नामांकन पत्र में आपराधिक इतिहास से संबंधित जानकारी छिपाने के कारण यह फैसला आया. याचिकाकर्ता मुंतज़ीर की शिकायत पर अदालत ने सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया, जिससे राजनीति में हलचल तेज हो गई है.
रटौल नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर साल 2023 में चुनाव हुआ था. चुनाव में जुनैद फारुख को जीत मिली थी. लेकिन दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार ने मुंतज़ीर पुत्र मौसम अली ने निर्वाचित अध्यक्ष के नामांकन पत्र पर सवाल उठाए. साथ ही कोर्ट में चुनावी याचिका दायर करते हुए निर्वाचन रद्द करने की मांग की थी. वहीं, अब कोर्ट ने चुनाव परिणाम को निरस्त कर दिया है.
अदालत ने दस्तावेजों और साक्ष्यों पर सुनाया फैसला
यह फैसला चुनाव याचिका संख्या 01/2023 में सुनाया गया. मुंतज़ीर ने याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुईं और निर्वाचित प्रत्याशी जुनैद फारुख के नामांकन पत्र में जरूरी तथ्यों को छिपाया गया था. मुंतज़ीर का कहना था कि मतगणना के दौरान भी कई तरह की गड़बड़ियां हुईं, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ.
मामले की विस्तृत सुनवाई के दौरान अदालत ने दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण किया. सुनवाई के बाद कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंची कि नामांकन पत्र में आवश्यक जानकारी पूरी तरह से नहीं दी गई थी, जिससे चुनाव की वैधता प्रभावित हुई. इसी आधार पर अदालत ने रटौल नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर निर्वाचित जुनैद फारुख का चुनाव शून्य घोषित कर दिया.
दो साल कानूनी लड़ाई के बाद मिला न्याय- मुंतज़ीर
अदालत ने अपने आदेश में जिला निर्वाचन अधिकारी बागपत को निर्देश दिए हैं कि वे उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 25(2)(बी) के तहत एक माह के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें. यह आदेश 7 मार्च 2026 को अपर जिला न्यायाधीश पवन कुमार राय द्वारा पारित किया गया. कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ता ने खुशी जताई है.
मुंतज़ीर ने कहा कि उन्होंने करीब दो साल तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद उन्हें न्याय मिला है. उनका आरोप था कि चुनाव के दौरान उन्हें फर्जी तरीके से हराया गया था, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. वहीं, इस फैसले के बाद रटौल नगर पंचायत की राजनीति में हलचल है. साथ ही मुंतज़ीर के नए चेयरमैन बनने की संभावना जताई जा रही है.
