टोल पर ‘गुंडई’ से नाराज SC, वकीलों पर होगा एक्शन; दिल्ली ट्रांसफर हुआ केस
सुप्रीम कोर्ट ने बाराबंकी टोल प्लाजा पर वकीलों की 'गुंडई' और हंगामे पर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने जिला प्रशासन और पुलिस को फटकार लगाई, टोल कर्मियों को जमानत दी और वकीलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बार काउंसिल को निर्देशित किया है. वहीं निष्पक्ष सुनवाई के लिए यह मामला अब दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है.
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में टोल प्लाजा पर हंगामे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जिला प्रशासन और पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है. इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट ने हंगामा करने वाले वकीलों पर तल्ख टिप्पणी करते हुए पूरा मामला ही उत्तर प्रदेश से हटाकर दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट में आरोपी टोल कर्मियों की अर्जी पर मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ में हुई. इसमें शीर्ष कोर्ट ने सभी आरोपियों पर जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं.
मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सहकर्मी भावना के नाम पर हिंसा को किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. बता दें कि 14 जनवरी 2026 को बाराबंकी के एक टोल प्लाजा पर वकील रत्नेश शुक्ला के साथ टोल कर्मियों की झड़प हुई थी. इसके बाद बड़ी संख्या में वकीलों ने टोल पर पहुंचकर हंगामा किया था. यही नहीं, जिला बार एसोसिएशन ने आरोपियों की पैरवी नहीं करने का प्रस्ताव तक पारित कर दिया था. इसके बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी.
पुलिस प्रशासन को लगी फटकार
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि टोल कर्मचारी अपना काम कर रहे थे. इसके बाद भी उन्हें दो महीने से भी अधिक समय तक जेल में रखा गया. यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है. कोर्ट ने सभी आरोपियों को तत्काल जमानत पर रिहा करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को दोषी वकीलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है.
दिल्ली में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष सुनवाई पर जोर देते हुए मामले को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया है. कहा कि अब इस मामले की सुनवाई दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में होगी. इसी के साथ शीर्ष कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को आरोपियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा है. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने न्याय के मंदिर में अराजकता पर चिंता जताई है. कहा कि कोई संस्थागत दबाव के जरिए न्याय को रोकने की कोशिश करे तो शीर्ष कोर्ट चुप नहीं रहेगा.
