हिंदू नाम से नेपाल में छिपा था 100 करोड़ के GST घोटाले का सरगना, इस कारोबारी परिवार से है कनेक्शन
बरेली के 100 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले का सरगना फरजान हाशमी नेपाल में गिरफ्तार हो गया है. 'संदीप' नाम से छिपा यह जालसाज फर्जी फर्मों के जरिए बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पास कराता था. इस मामले में हाशमी सुरमा परिवार से संबंध, कई बैंक लेनदेन और खातों से पैसा निकालने का खुलासा हुआ है. जांच में कई फर्मों और मास्टरमाइंड सागर अग्रवाल की भूमिका सामने आई है.
बरेली में फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पास कराने वाले सिंडिकेट का सरगना नेपाल में अरेस्ट हो गया है. वहां यह जालसाज हिंदू नाम और पहचान के साथ छिपा था. आरोपी की पहचान फरजान हाशमी के रूप में हुई है. यह बरेली के बहुचर्चित हाशमी सुरमा कारोबार से जुड़े परिवार का रिश्तेदार बताया जा रहा है. पुलिस के मुताबिक GST विभाग की कार्रवाई के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए यह नेपाल भाग गया था.
वहां यह संदीप नाम से नई अपनी पहचान बनाकर रह रहा था.पुलिस की जांच में इस पूरे नेटवर्क में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के बैंक लेनदेन का मामला सामने आया हैं. वहीं, पूछताछ में 80 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अलग-अलग खातों से निकालकर बांटने और लाभार्थी फर्मों तक पहुंचाने की जानकारी मिली है. हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही फर्जीवाड़े की वास्तविक रकम और सरकारी राजस्व को हुए नुकसान की तस्वीर साफ हो सकेगी.
फर्जी फर्मों के नाम पर काटते थे बिल
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने कई ऐसी फर्में तैयार की थीं, जिनका जमीन पर कोई वास्तविक कारोबार नहीं था. फर्जी दस्तावेजों और क्रेडेंशियल्स के जरिए इन फर्मों का GST रजिस्ट्रेशन कराया जाता था. इसके बाद बिना किसी सामान की वास्तविक खरीद-बिक्री के करोड़ों रुपये के बिल काटे जाते थे. इन फर्जी बिलों के आधार पर दूसरी फर्में ITC का दावा करती थीं. इसके बाद बैंक खातों में रकम का लेनदेन किया जाता और कई खातों के जरिए पैसा घुमाकर नकद निकासी किया जाता था.
पूरी चेन का खुलासा
जांच में FS Traders, सिद्धि विनायक एंटरप्राइज, मां एंटरप्राइज, नाईट स्टार , आर्ट लाइफ़ एसोसिएट, अर्हम एग्रो फूड्स और केएच इंटरप्राइजेज समेत कई फर्मों के नाम सामने आए हैं. पुलिस का कहना है कि इन फर्मों के बीच फर्जी बिलिंग की पूरी चेन तैयार की गई थी. पुलिस की पूछताछ में फरजान ने बताया कि बरेली में DM कंपाउंड के सामने एक बिल्डिंग में ऑफिस खोला गया था. यहां वह विनीत अरोरा और अनुज अग्रवाल के साथ बैठता था. आरोप है कि इसी ऑफिस से फर्जी इनवॉइस तैयार किए जाते और फर्मों से जुड़े काम किए जाते थे.
कौन है गिरोह का मास्टरमाइंड?
एसपी क्राइम मनीष चंद्र सोनकर के मुताबिक, पूछताछ में सागर अग्रवाल की भूमिका पूरे नेटवर्क के मुख्य सरगना के तौर पर सामने आई है. आरोप है कि वह फर्जी फर्मों और लाभार्थी फर्मों के बीच मुख्य कड़ी का काम करता था. विनीत अरोरा, अनुज अग्रवाल और शिवम गुप्ता उर्फ लाला की भूमिका भी जांच में सामने आई है. पुलिस के अनुसार, अलग-अलग आरोपियों को रकम के सेटलमेंट, फर्जी फर्मों के रिटर्न और पैसों को आगे पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी.
