मुकाम तक पहुंचा 10 साल का प्यार, शाहजहां बनी प्रतीक्षा; पवन संग अगस्त्य मुनि आश्रम में लिए सात फेरे
जौनपुर की रहने वाली शाहजहां बानो ने प्रतापगढ़ के रहने वाले पवन के साथ बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया है. विवाह से पहले शाहजहां बानो ने स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाया और अपना नाम प्रतीक्षा रखा. फिर आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए.
उत्तर प्रदेश के बरेली की एक शादी सुर्खियों में है. जौनपुर की रहने वाली शाहजहां बानो ने प्रतापगढ़ के रहने वाले पवन के साथ बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया है. विवाह से पहले शाहजहां बानो ने स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाया और अपना नाम प्रतीक्षा रखा. फिर आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए. एक-दूसरे का जीवनभर साथ निभाने का वचन दिया और नए जीवन की शुरुआत की.
शाहजहां बानो जौनपुर जिले के भीलमपुर की रहने वाली हैं, जबकि पवन प्रतापगढ़ के भोजेमऊ गांव के निवासी हैं. दोनों की पहचान स्कूल के दिनों में हुई थी. बाद में दोनों ने एक ही कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई भी पूरी की. पढ़ाई के दौरान दोनों की दोस्ती गहरी होती गई और यही दोस्ती धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई. करीब दस साल तक दोनों एक-दूसरे के संपर्क में रहे और अब शादी करने का फैसला किया.
परिवार की सहमति के बिना की शादी
दोनों ने अपने-अपने परिवारों को शादी के बारे में बताया, लेकिन उन्हें सहमति नहीं मिली. इसके बाद दोनों ने अपने भविष्य को देखते हुए साथ रहने का फैसला किया. इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में ऐसे बालिग जोड़ों का विवाह हिंदू रीति-रिवाज से कराया जाता है, जो अपनी इच्छा से शादी करना चाहते हैं. इसके बाद दोनों सीधे बरेली पहुंचे और आश्रम में विवाह का अनुरोध किया.
आश्रम में हुई दस्तावेजों की जांच
आश्रम के पंडित केके शंखधार ने बताया कि सबसे पहले दोनों के शैक्षिक दस्तावेज और आयु से जुड़े प्रमाण देखे गए. दस्तावेजों की जांच में दोनों बालिग पाए गए. इसके बाद आवश्यक धार्मिक प्रक्रिया पूरी कराई गई. शाहजहां ने अपनी इच्छा से सनातन धर्म अपनाने की बात कही और अपना नया नाम प्रतीक्षा रखा. इसके बाद वैदिक विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया गया. विवाह के दौरान पवन ने प्रतीक्षा की मांग में सिंदूर भरा और मंगलसूत्र पहनाकर सात फेरे लिए.
