टीचरों की नई ड्यूटी, अब गायों के लिए भूसा जुटाने का मिला काम, 1500 कुंतल का है टार्गेट

बरेली में अब शिक्षक गायों के लिए भूसा भी जुटाने का काम करेंगे. मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की तरफ से बेसिक शिक्षा विभाग को कुल 1500 कुंतल भूसा जुटाने का लक्ष्य दिया गया है. ऐसे में बीएसए ने जिले के 15 खंड शिक्षा अधिकारियों को 100-100 कुंतल भूसा एकत्र करने की जिम्मेदारी सौंप दी. हर स्कूल से करीब 46 किलो भूसा देने के लिए कहा गया है. इस आदेश को लेकर शिक्षकों में भारी नाराजगी है.

शिक्षकों को भूसा इकट्ठा करने का आदेश पर नप गए BEO

बरेली जिले में शिक्षा विभाग का एक आदेश इन दिनों चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है. जिले के शिक्षकों को अब स्कूलों की पढ़ाई के साथ-साथ निराश्रित गोवंशों के लिए भूसा जुटाने की जिम्मेदारी भी दी गई है. सबसे ज्यादा चर्चा नवाबगंज खंड शिक्षा अधिकारी के उस पत्र की हो रही है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल लेटर में शिक्षकों से भूसा एकत्र कराने के निर्देश दिए गए हैं. आदेश सामने आने के बाद शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिल रही है.

1500 कुंतल का लक्ष्य

जानकारी के मुताबिक जिले की गोशालाओं में रखे निराश्रित गोवंशों के लिए भूसे की व्यवस्था कराने को प्रशासन ने अभियान शुरू किया है. मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की तरफ से बेसिक शिक्षा विभाग को कुल 1500 कुंतल भूसा जुटाने का लक्ष्य दिया गया है. इसके बाद बीएसए ने जिले के 15 खंड शिक्षा अधिकारियों को 100-100 कुंतल भूसा एकत्र करने की जिम्मेदारी सौंप दी. ब्लॉक स्तर पर स्कूलों को भी लक्ष्य बांटे गए हैं. बताया जा रहा है कि हर स्कूल से करीब 46 किलो भूसा देने के लिए कहा गया है, ताकि तय लक्ष्य समय पर पूरा किया जा सके.

शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी

नवाबगंज ब्लॉक से जारी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला और गरमा गया. वायरल लेटर में शिक्षकों से भूसा संग्रह में सहयोग करने को कहा गया है. जैसे ही यह पत्र व्हाट्सऐप ग्रुपों में पहुंचा, शिक्षकों के बीच नाराजगी खुलकर सामने आने लगी. कई शिक्षकों का कहना है कि उनका काम बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन लगातार गैर शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ता जा रहा है.

शिक्षकों का कहना है कि पहले से ही उन पर चुनाव ड्यूटी, जनगणना, सर्वे, पोर्टल फीडिंग और दूसरी सरकारी जिम्मेदारियां रहती हैं. अब भूसा इकट्ठा करने का काम भी जोड़ दिया गया है. कई शिक्षकों ने यह भी कहा कि गांवों के स्कूलों में पहले ही स्टाफ की कमी है और ऐसे आदेशों से पढ़ाई प्रभावित होती है.

बेसिक शिक्षा विभाग का एक आदेश विवादों में आ गया है. दरसअल, नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव द्वारा जारी किए गए लेटर में हर स्कूल से 46 किलो भूसा दान करने की बात कही गई थी. इतना ही नहीं, आदेश का पालन न करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी लिखी गई थी। लेटर जारी होने के बाद जिले के शिक्षकों में भारी नाराजगी फैल गई.

कार्रवाई की चेतावनी वाला लेटर गलती से जारी हुआ?

वहीं दूसरी तरफ मीरगंज के खंड शिक्षा अधिकारी अवनीश कुमार का एक अलग लेटर जारी हुआ है. इसमें साफ लिखा गया कि शिक्षक अपनी स्वेच्छा से भूसा दान कर सकते हैं और किसी पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. दो अलग-अलग तरह के आदेश सामने आने के बाद पूरा मामला चर्चा में आ गया है और शिक्षक संगठन खुलकर विरोध कर रहे हैं.

डीएम ने कहा उन्हें चेतावनी वाले लेटर की जानकारी नहीं

वहीं बरेली के डीएम अविनाश सिंह ने कहा कि जिले में बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है. अस्थायी और स्थायी गौशालाओं में गोवंश को रखा जा रहा है और उनके लिए हर ब्लॉक में भूसा बैंक बनाया गया है। लोगों से आर्थिक क्षमता के अनुसार भूसा दान करने की अपील भी की गई है. लेकिन जब नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी 46 किलो भूसा दान के आदेश और कार्रवाई की चेतावनी पर सवाल पूछा गया तो डीएम ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है.

अधिकारियों ने कहा- गोशालाओं के लिए जरूरी है अभियान

वहीं विभागीय अधिकारी इस पूरे अभियान को सामाजिक जिम्मेदारी बता रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि गोशालाओं में निराश्रित पशुओं के लिए चारे की कमी न हो, इसलिए सभी विभागों से सहयोग लिया जा रहा है. बीएसए की तरफ से भी इसे लोककल्याण से जुड़ा काम बताया गया है. अधिकारियों का कहना है कि समाजसेवियों, प्रधानों और किसानों की मदद से भूसा एकत्र कराया जाएगा.

फिलहाल नवाबगंज खंड शिक्षा अधिकारी का वायरल लेटर जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. सोशल मीडिया पर लोग इस मामले को लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं. कोई इसे प्रशासन की जरूरत बता रहा है तो कोई शिक्षकों पर बढ़ता अतिरिक्त बोझ मान रहा है.

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