दो महीने से अपने ही घर में कैद 10वीं का छात्र, अब जिंदा जलाने की हुई कोशिश, जानें क्या है मामला
बस्ती में एक संपत्ति विवाद के चलते 10वीं का छात्र दो महीने से अपने ही घर में कैद है. अब उसे जिंदा जलाने की कोशिश भी की गई है. इस मामले को पीड़ित परिवार पुलिस के पास पहुंचा. लेकिन पुलिस ने जो रवैया अपनाया वह बेहद हैरान करने वाला है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां एक नाबालिग छात्र पिछले दो महीनों से अपने ही घर में कैद है. बीती रात उसे जिंदा जलाने की भी कोशिश हुई. उसका कसूर सिर्फ इतना है कि उसके पिता का अपने भाई के परिवार से संपत्ति विवाद चल रहा है. यह मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के महुडर गांव का बताया जा रहा है.
छात्र के पिता उदयभान का अपने पिता और भाई जितेंद्र से पिछले कई सालों से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है. उदयभान का आरोप है कि जिस मकान में वे पिछले करीब 20 सालों से रह रहे हैं. उनके पिता ने यह मकान गुपचुप तरीके से भाई की पत्नी के नाम करा दिया. फिलहाल, मामला न्यायालय में विचाराधीन है.
दो महीने विरोधी पक्ष के लोगों ने स्थानीय पुलिस के कथित सहयोग से हर्ष के घर के सामने ऊंची दीवार खड़ी कर गेट लगाकर ताला जड़ दिया. इससे घर से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता पूरी तरह बंद हो गया. ऐसे में नाबालिग हर्ष को घर के अंदर कैद रहना पड़ा. वहीं, उसके माता-पिता काम के सिलसिले में बाहर रहने को मजबूर हैं.
बीती रात हर्ष को जिंदा जलाने की कोशिश
इन सबके बीच बीती देर रात, जब हर्ष घर के अंदर सो रहा था तभी अज्ञात दबंगों ने घर में आग लगा दी. धुएं और आग की लपटों से घिरा हर्ष जान बचाने के लिए चीखता-चिल्लाता रहा. शोर सुनकर आसपास के लोग और माता-पिता मौके पर पहुंचे. फिर जाकर किसी तरह उसकी जान बच पाई.
हर्ष ने बताया कि वह दो महीने से घर में बंद है. बहुत डर लगता है. अब बोर्ड का एग्जाम है, अगर बाहर नहीं निकल पाया तो मेरी पढ़ाई बर्बाद हो जाएगी. वह लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रहा है. कई बार पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.अब जब बोर्ड परीक्षा सिर पर है, तब भी वह घर से बाहर निकलने में असमर्थ है. पीड़ित परिवार ने प्रशासन से घर के सामने का रास्ता तत्काल खुलवाने की मांग की है .लेकिन इस पूरे मामले में पुलिस का रुख चौंकाने वाला है.
पुलिस ने कहा- कोर्ट में मामला, हस्तक्षेप नहीं कर सकती
डीएसपी सत्येंद्र भूषण तिवारी का कहना है कि मामला कोर्ट में है इसलिए पुलिस इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती .अगर बच्चा बाहर निकलना चाहे तो पुलिस मदद करेगी. लेकिन गेट का ताला खुलवाने का अधिकार पुलिस के पास नहीं है.सवाल यह है कि कोर्ट में मामला होने के बावजूद रास्ता बंद करने की इजाजत किसने दी? क्या न्यायालय के फैसले तक एक नाबालिग को बंधक बनाकर रखना जायज़ है? आगजनी जैसी गंभीर घटना के बाद भी कार्रवाई से पुलिस क्यों बच रही है?क्या एक बच्चे की शिक्षा और जीवन, संपत्ति विवाद से कम अहम है?
पीड़ित परिवार ने अब मुख्यमंत्री पोर्टल पर लगाई न्याय की गुहार
पीड़ित परिवार ने अब मुख्यमंत्री पोर्टल और वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है. ग्रामीणों में भी भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि किसी का रास्ता रोकना और उसे घर में कैद करना सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य और मानवाधिकारों का उल्लंघन है.अ गर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई,तो यह मामला सिर्फ बस्ती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल बन जाएगा. फिलहाल, बच्चे को जलाने की कोशिश के चलते गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है.
