न पर्ची-ना भर्ती, इलाज के नाम पर आयुष्मान कार्ड से कट गए रुपये; पूछने पर CMS बोले- गलती हो गई

चंदौली के सरकारी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. एक व्यक्ति के बिना इलाज और पर्ची के आयुष्मान वॉलेट से 2310 रुपये काट लिए गए. अस्पताल के सीएमएस ने इसे 'गलती' बताया है, लेकिन जांच में कई अन्य लोगों के साथ भी ऐसा होने का खुलासा हुआ है. यह घटना एक बड़े घोटाले की आशंका बढ़ा रही है.

पंडित कमला पति त्रिपाठी अस्पताल चंदौली

सरकार आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा दे रही है. इसके लिए लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं. लेकिन अब इस आयुष्मान कार्ड में धांधली शुरू हो गई है. यह धांधली कोई और नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों के अधिकारी और कर्मचारी ही कर रहे हैं. ताजा मामला उत्तर प्रदेश के चंदौली का है. यहां एक व्यक्ति ने न तो अस्पताल में कोई पर्ची कटाई और ना ही कोई इलाज कराया. लेकिन उसके आयुष्मान वॉलेट से 2310 रुपये कट गए. इसकी जानकारी होने पर उसने अस्पताल में पूछताछ की तो पहले अजीबोगरीब जवाब मिला, लेकिन सीएमएस से शिकायत के बाद उन्होंने गलती मान ली है.

मामला चंदौली के पं. कमलापति त्रिपाठी जिला संयुक्त चिकित्सालय का है. इस अस्पताल में पिछले दिनों मुगलसराय के रहने वाले अमन कुमार जिला अपने आयुष्मान कार्ड की री-केवाईसी कराने आए थे. इसके लिए उन्होंने अस्पताल में अंगूठा लगाया था. केवाईसी के बाद वह घर पहुंचे तो पता चला कि उनके वॉलेट से 2310 रुपये कट गए हैं. यह रकम इंटेरिक फीवर के इलाज के नाम पर काटा गया था. इस संबंध में उन्होंने तत्काल अस्पताल कार्यालय में फोन पर शिकायत दी, लेकिन कहा गया कि यह रकम प्रोसेसिंग फीस के तौर पर काटी गई है.

निशुल्क होता है केवाईसी

अस्पताल कार्यालय मिली इस जानकारी के बाद पीड़ित ने जांच पड़ताल की तो पता चला कि केवाईसी निशुल्क होती है. इसके बाद पीड़ित ने अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसपी सिंह से मिलकर शिकायत दी. सीएमएस ने भी अपने स्तर पर मामले की जांच कराई और बताया कि गलती से यह रकम कट गई है. उन्होंने बताया कि केवाईसी का कोई चार्ज नहीं है. यह गलती किसी संविदाकर्मी की वजह से हुई है. उन्होंने अधीनस्थ कर्मचारियों से इस गलती में सुधार करने और पीड़ित के खाते में राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं.

उठे कई सवाल

इस घटना के बाद आयुष्मान कार्ड को लेकर तमाम तरह के सवाल उठने लगे हैं. पहला सवाल तो यही है कि बिना पर्ची कटाए या बिना भर्ती किए कैसे किसी के वॉलेट से पैसे कटे? जबकि किसी भी मरीज को अस्पताल में भर्ती किया जाता है तो आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है. आयुष्मान कार्ड से भुगतान के लिए डॉक्टर की एंट्री, अप्रूवल और सिस्टम लॉग भरना जरूरी होता है. ऐसे में सवाल यह भी है कि जब इसमें से कोई औपचारिकता नहीं हुई तो राशि कैसे कटी?

बड़े घोटाले की आशंका

इस घटना के बाद स्थिति साफ हुई तो कई अन्य लोगों ने भी अपने आयुष्मान कार्ड वॉलेट का बैलेंस चेक किया. इसमें पता चला कि जिन लोगों ने अस्पताल में आकर केवाईसी या रीकेवाईसी कराया है, सबके खाते से कुछ ना कुछ रकम काटी गई है. पूछने पर अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि यह राशि री-रजिस्ट्रेशन शुल्क के तौर पर काटी गई है और कटा हुआ पैसा सरकारी खजाने में गया है. जबकि सीएमएस ने इसका खंडन किया है. बता दें कि इस अस्पताल के कमरा नंबर 5 में रोजाना 40 से 50 लोगों का केवाईसी और री-केवाईसी होता है.