अचानक मायावती से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेता, गेट ही नहीं खुला, अब देने लगे सफाई

यूपी में राजनीतिक हलचलें तब तेज हो गई जब अचानक से कांग्रेस के नेता तनुज पुनिया और राजेंद्र पाल गौतम मायावती से मिलने उनके आवास पहुंच गए. हालांकि, सिक्योरिटी ने अपॉइंटमेंट न होने का हवाला देते हुए उन्हें वापस लौटा दिया और कहा कि बिना समय लिए न आएं. अब सवाल ये है कि क्या कांग्रेस 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बसपा से हाथ मिलाना चाहती है.

मायावती से मिलने पहुंचे थे कांग्रेसी नेता

यूपी में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसमें एक साल से भी कम का वक्त बचा हुआ. लेकिन राज्य में राजनीतिक हलचलें अभी से तेज हो गई हैं. दरअसल, बाराबंकी से कांग्रेस सांसद के बीएसपी सुप्रीमो से मुलाकात के प्रयास ने नए राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया है.

सिक्योरिटी ने कांग्रेसी नेताओं को वापस लौटाया

तनुज पुनिया ने कहा कि मायावती देश की वरिष्ठ नेता हैं और दलित समाज का बड़ा चेहरा हैं. उनकी उम्र 70 साल से अधिक हो चुकी है, इसलिए वह उनका हालचाल जानने पहुंचे थे. हालांकि, दोनों की मुलाकात नहीं हो सकी. दरअसल, सिक्योरिटी ने अपॉइंटमेंट न होने का हवाला देते हुए उन्हें वापस लौटा दिया और कहा कि बिना समय लिए न आएं.

कांग्रेसी नेताओं ने सफाई में क्या कहा?

कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया और कांग्रेस अनुसूचित जाति सेल के नेता राजेंद्र पाल ने मायावती से मिलने का समय मांगा था. राजेंद्र पाल गौतम ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि दोनों नेता मायावती से उनका हालचान जानने पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई. उन्होंने कहा कि आगे भी मिलने का प्रयास जारी रहेगा.

बसपा से हाथ क्यों मिलाना चाहती है कांग्रेस

हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को कांग्रेस और बीएसपी के संभावित गठबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है. लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन था, लेकिन सीटों के सीमित बंटवारे के कारण कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी. ऐसे में माना जा रहा है कि अगर 2027 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीएसपी के बीच गठबंधन होता है तो कांग्रेस को अधिक सीटें मिल सकती हैं.

सांसद तनुज पुनिया के पिता मायावती के प्रमुख सचिव रह चुके हैं

बता दें कि सांसद तनुज पुनिया के पिता मायावती के प्रमुख सचिव रह चुके हैं. दलित समाज से जुड़े होने के कारण दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक नजदीकियां भी बताई जाती रही हैं. राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के दलित नेताओं की इस पहल को की नई राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं.

मायावती के सहारे कांग्रेस क्या करना चाहती है?

माना जा रहा है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक को मजबूत करने के लिए बीएसपी के साथ संवाद की संभावनाएं तलाश रही है. वहीं, मायावती लगातार कांग्रेस पर हमलावर रुख अपनाती रही हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों के संबंध किस दिशा में जाते हैं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है.

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