तीन जगह से टेढ़े हैं ठाकुर जी… भगवान श्रीकृष्ण पर धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से बवाल, ब्रज में नाराजगी
धीरेंद्र शास्त्री के श्रीकृष्ण पर दिए गए बयान से ब्रजवासी और संत समाज आक्रोशित हैं. उन्होंने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए श्रीकृष्ण की 'टेढ़ी' मुद्रा पर टिप्पणी की थी. मथुरा-वृंदावन में इस पर कड़ी आपत्ति जताई गई है.
बागेश्वर धाम के पीठाधिश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के भगवान श्रीकृष्ण पर दिए गए बयान से ब्रजवासी और संत समाज आक्रोशित हैं. उन्होंने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए श्रीकृष्ण की “टेढ़ी” मुद्रा पर टिप्पणी की थी. संतों ने इसे आराध्य का अपमान बताते हुए कहा है कि ब्रजभूमि में श्रीकृष्ण के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा.
धीरेंद्र शास्त्री ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में श्रीराम कथा के दौरान यह विवादित बयान दिया. उन्होंने भगवान श्री राम और श्री कृष्ण के स्वरूप और मुद्राओं की तुलना की. शास्त्री ने कहा, ‘तुम अपने वाले ठाकुर जी की एक भी फोटो देख लो, खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े. जबकि भगवान राम का नाम भी सीधा है. चलना भी सीधा. दिखते भी सीधे हैं.
‘बंसी बजाना आसान, लेकिन धनुष चलाना मुश्किल’
वायरल वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री जोर-जोर से हंसते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं कि, ‘ठाकुर जी तो चलते भी टेढ़े हैं, जब खड़े होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े हैं.’ उन्होंने श्रीकृष्ण के खड़े होने के अंदाज, कमर लचकाने, गर्दन टेढ़ी करके बंसी बजाने और वृंदावन का जिक्र किया. साथ ही यह भी टिप्पणी की कि बंसी बजाना आसान है, लेकिन धनुष चलाना आसान नहीं होता.
उन्होंने इसके बाद तुलना करते हुए कहा कि भगवान राम का नाम भी सीधा है, चलना भी सीधा है और वे दिखते भी सीधे हैं. धाम भी सीधा है, अयोध्या. साथ ही कहा कि बांसुरी भी बजाना कोई ज्यादा मुश्किल नहीं है. लेकिन धनुष चलाना मुश्किल है. साथ ही मजाक उड़ाते कहा कि बांसुरी तो हमारे साथ बैठे ये लोग भी बजाते हैं.
‘भगवान के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं’
धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान को लेकर ब्रजवासियों और संत समाज में नाराजगी सामने आई है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज सहित अन्य संतों ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है. संतों ने इसे आराध्य का अपमान बताते हुए कहा है कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही सनातन धर्म के आराध्य हैं.
उनका कहना है कि दोनों की तुलना कर किसी भी भगवान के प्रति आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है. संतों ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली ब्रजभूमि में उनके आराध्य के प्रति इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी. ब्रजवासियों की आस्था भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है और उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता.