देश में टॉप पर गाजियाबाद, तीसरे स्‍थान पर नोएडा; UP के इन शहरों ने जनवरी में तोड़ा प्रदूषण का सारा रिकॉर्ड

गाजियाबाद जनवरी में देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि नोएडा तीसरे स्थान पर. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे महीने इन शहरों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रही, जिससे जहरीली धुंध छाई रही. यह स्थिति शहरवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम छोड़ सकती है.

प्रदूषण में टॉप पर गाजियाबाद

उत्‍तर प्रदेश में ड्रीम सिटी बनने की कोशिश कर रहे नोएडा और गाजियाबाद को लेकर एक चौंकाने वाली खबर है. यह दोनों शहर पिछले महीने देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में टॉप पर रहे हैं. यहां 24 घंटे दमघोटूं हवाएं चली हैं और पूरे महीने ये शहर जहरीली धुंध की गिरफ्त में रहे हैं. यह खुलासा खुद सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने अपने आंकड़ों में किया है. बोर्ड ने दावा किया है क‍ि बीते महीने गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा है.

इस सूची में प्रदूषण बोर्ड ने नोएडा की लिस्टिंग तीसरे स्‍थान पर की है. बोर्ड ने यह रिपोर्ट सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषण के आधार पर जारी क‍िया है. इसमें कहा गया है क‍ि इन शहरों में हवा की गति कम रहने की वजह से प्रदूषक कण वातावरण में ही फंस रह गए. परिणाम स्‍वरुप गाजियाबाद जहां देश का सबसे प्रदूष‍ित शहर बना, वहीं दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम लगातार दूसरे, तीसरे और चौथे स्‍थान पर आ गए.

केवल एक दिन मिली साफ हवा

इस र‍िपोर्ट में दावा किया गया है क‍ि गाजियाबाद में पूरे जनवरी महीने में केवल एक ही दिन हवा की गुणवत्ता मॉडरेट श्रेणी में रही है. इस रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी में गाजियाबाद की हवा 16 दिन बहुत खराब रही, 12 दिन खराब और 2 दिन गंभीर श्रेणी में रही है. कमोबेस यही स्थित‍ि नोएडा और ग्रेटर नोएडा की भी रही है. माना जा रहा है इतने प्रदूषण के बीच पूरे महीने रहे शहर वासियों की सेहत पर दूरगामी असर पड़ सकता है.

हवा हवाई रहे सारे इंतजाम

गाजियाबाद में प्रदूषण से निपटने के लिए नगर निगम ने बड़े बड़े दावे किए थे. इसमें करीब 220 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स शुरू करने की बात कही गई थी. इसमें भी करीब 30 करोड़ का बजट वायु गुणवत्ता सुधार के लिए रखा गया था. इतनी सारी कवायद और खर्चो के बाद भी शहर में प्रदूषण को रोका नहीं जा सका. हालात को देखते हुए पर्यावरण विशेषज्ञों ने नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) लागू करने की जरूरत बताई है.