सैन्य ठिकानों पर कैमरा, विदेश भेजे 12 भारतीय सिम; गाजियाबाद जासूसी कांड में NIA का बड़ा खुलासा
एनआईए ने गाजियाबाद जासूसी कांड में चार्जशीट दाखिल कर दी है. इसमें बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर संवेदनशील स्थानों पर सोलर पैनल कैमरे लगाकर निगरानी की जा रही थी. फुटेज पाकिस्तानी आतंकियों को भेजे गए. इस मामले में 12 भारतीय सिम कार्ड जूते में छुपाकर दुबई भेजे गए. इस मामले में अब तक 21 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है.
एनआईए ने गाजियाबाद जासूसी कांड में सभी 13 आरोपियों के खिलाफ अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है. इसमें एनआईए ने इस जासूसी कांडी की परतों को सिलसिलेवार उधेड़ने की कोशिश की है. बताया है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर के इशारे पर कैसे देश के संवेदनशील स्थानों, रेलवे और मेट्रो स्टेशनों पर सोलर पैनल कैमरा लगाकर निगरानी की जा रही थी. फिर इसकी फुटेज किन माध्यमों से पाकिस्तानी आतंकियों को भेजा गया.
अपनी चार्जशीट में एनआईए ने बताया है कि इस जासूसी कांड में 12 भारतीय सिम कार्ड जूते में छुपा कर दुबई भेजे गए थे. यह खुलासा एक आरोपी सरदार जोरा सिंह ने पूछताछ में किया था. उसकी निशानदेही और पहचान पर एनआईए अन्य आरोपियों तक पहुंची और बीते 15 फरवरी को दिल्ली कैंट स्टेशन पर लगा सोलर पैनल कैमरा बरामद किया था. इस कैमरे से पाकिस्तानी संगठन को लाइव किया जा रहा था.
सैन्य ठिकानों के भी मिले थे वीडियो
आरोपियों के पास से कई सैन्य प्रातिष्ठानों और ठिकानों के संवेदनशील वीडियो मिले थे. ये सभी वीडियो सोलर पैनल कैमरे से रिकॉर्ड किए गए थे. एनआईए के मुताबिक इन कैमरों को शिवा बाल्मीकि के नाम से पंजीकृत सिम कार्ड से ऑपरेट किया जा रहा था. इसके लिए आरोपी साने इरम ने सरदार जोरा सिंह को भारतीय सिम के साथ व्हाटसऐप इंस्टॉल करने के लिए दो ओटीपी भेजे थे. जबकि राज और शिवा वाल्मीकि ने 12 भारतीय सिम दुबई दुबई भेजे थे. ये सिम कार्ड जूते में छिपाकर कौशांबी से कोरियर किए गए थे.
21 आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
एनआईए ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में अब तक 21 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं. इनके खिलाफ इसी साल 18 मई को गाज़ियाबाद के किशोर न्याय बोर्ड में रिपोर्ट दाखिल कर दी गई थी. एनआईए ने सबूतों के साथ कोर्ट में बताया कि इन आरोपियों ने देश की संप्रभुता और अखंडता को छिन्न भिन्न करने की कोशिश की. यहां तक कि वे प्रतिबंधित व अति संवेदनशील क्षेत्रों में भी अवैध रूप से घुसकर फोटो और वीडियो बनाए. बाद में जियो-टैगिंग के साथ ये फोटो और वीडियो देश के दुश्मनों को भेजा गया.