टीचर की पिटाई से फूटी बच्चे की आंख, 2 महीने बाद FIR; स्कूल प्रबंधन ने दिया ये तर्क

गाजियाबाद के एक स्कूल में टीचर की पिटाई से नौंवी के छात्र की आंख फूट गई. यह घटना दो महीने पुरानी है, जिस पर अब FIR दर्ज हुई है. काफी इलाज के बाद भी छात्र की आंख की रोशनी नहीं लौट पायी है. उधर, स्कूल प्रबंधन आरोपों से इनकार कर रहा है. हालांकि पुलिस और शिक्षा विभाग मामले की जांच कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश पुलिस

राष्ट्रीय राजधानी से सटे उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद में एक हैरान कर देने वाली घटना हुई है. यहां वेव सिटी थाना क्षेत्र स्थित एक स्कूल में टीचर की पिटाई से एक नौंवी के छात्र की आंख फूट गई. इस संबंध में पीड़ित छात्र के परिजनों ने पुलिस में तहरीर दी है. पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है. वारदात करीब दो महीने पहले की है. उधर, स्कूल प्रबंधन ने पिता के आरोपों को खारिज किया है. कहा कि उनका स्कूल 8वीं तक है, जबकि पीड़ित छात्र 9वीं कथा का बताया जा रहा है.

फिलहाल पुलिस ने महिला टीचर, स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस के मुताबिक महरौली गांव में रहने वाले प्रवीण ने शिकायत दी है. बताया कि उनका बेटा वंश पिछले साल 20 दिसंबर को स्कूल गया था. क्लास में पढ़ाई के दौरान उसका पेन नीचे गिर गया और उठाने के लिए झुका ही था कि टीचर ने छड़ी मार दिया. इस दौरान छड़ी का अगला हिस्सा उनके बेटे की दाहिनी आंख में घुस गया.

दो महीने बाद भी नहीं लौटी रोशनी

आरोप है कि उस समय स्कूल के प्रिंसिपल ने लोकल डॉक्टर को दिखाने के बाद बच्चे को घर भेज दिया. वहीं घर पहुंचने पर परिजनों ने बच्चे की हालत देखी तो उसे गाजियाबाद और दिल्ली के कई डॉक्टरों को दिखाया. बहुत इलाज कराया, लेकिन आंख की रोशनी नहीं लौटी. डॉक्टरों ने बताया कि उसके आंख में छेद हो गया है. इसके बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दी. इस शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है.

स्कूल प्रबंधन ने खारिज किया आरोप

एसीपी वेब सिटी प्रियाश्री पाल ने घटना की पुष्टि की. कहा कि अब तक दोनों पक्षों में समझौते की बात हो रही थी. समझौता ना होने पर तहरीर दी गई है. उधर, स्कूल के प्रबंधक सुकरम पाल ने बताया कि बच्चे के परिजनों का आरोप ही गलत है. उन्होंने कहा कि शिकायत में बताया गया है कि बच्चा नौंवी में पढ़ता है. जबकि उनका स्कूल केवल आठवीं तक ही है. ऐसे में यह बच्चा उनके स्कूल का हो ही नहीं सकता. मामला गहराने पर शिक्षा विभाग ने भी अपने स्तर पर मामले की जांच शुरू कर दी है.