CM योगी तक पहुंची गोमनीनगर एक्सटेंशन में 3500 करोड़ के जमीन घोटाले की बात, बैठी जांच

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में गोमती नगर एक्सटेंशन योजना में घोटाले को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जांच के आदेश दिए हैं. इसमें 3500 करोड़ रुपये के जमीन के घोटले की बात सामने आई है. इस योजना को एससी समुदाय के लोगों को आवासीय सुविधा मुहैया कराए जाने के लिए लाया गया था.

प्लॉट (फाइल फोटो) Image Credit: Freepik

उत्तर प्रदेश के लखनऊ के गोमती नगर में 3500 करोड़ रुपए के जमीन के घोटाले मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के डीएम और लखनऊ विकास प्राधिकरण वीसी को जांच के निर्देश दिए हैं. लखनऊ में गोमती नगर एक्सटेंशन योजना के तहत आवंटित 3.59 लाख वर्ग फीट जमीन, जिसकी अनुमानित कीमत 3500 करोड़ रुपये है. इस घोटाले के पीछे शामिल लोगों के जानकारी के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के आदेश दिए हैं.

समिति की ओर से फर्जी डॉक्यूमेंट की मदद से इसके प्लॉट्स को अपने रिश्तेदारों ओर जान-पहचान के लोगों के नाम से रजिस्टर करा दिया. समिति के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण सिंह वाफिला और पूर्व सचिव लखन सिंह बलियानी के द्वारा ऐसा करने की वजह से सरकार को भारी नुकसान हुआ है.

क्या थी लखनऊ हाई कोर्ट की टिप्पणी?

इस मामले पर लखनऊ हाई कोर्ट की ओर से भी सख्त टिप्पणी भी की गई थी.  न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये सरासर ‘सरकारी जमीनों की लूट’ है. कोर्ट में दायर याचिका में बताया गया कि इस समिति को इसलिए बनाया गया था ताकि एससी समुदाय के लोगों को रहने के लिए घर उपलब्ध कराए जाएं.

फिलहाल, ऐसा नहीं हो सका. एससी समुदाय के लोगों के उलट इसके प्लाट दूसरे लोगों को आवंटित कर दिए गए. इसमें ज्यादा रुपये लेकर दो संपत्तियों को बेच दिया. लेकिन, इसके बदले में उन्हें जो पैसे मिले उसके बारे में कोई पक्का हिसाब नहीं मिल सका है.

अदालत में दायर याचिका में बताया गया कि समिति का मूल उद्देश्य अनुसूचित जाति के लोगों को आवास उपलब्ध कराना था, लेकिन इसके उलट, अयोग्य व्यक्तियों को भूखंड आवंटित किए गए. इतना ही नहीं, समिति के गैर-सदस्यों ने दो संपत्तियों की बिक्री कर दी, जिनसे प्राप्त मोटी रकम समिति के खाते में जमा नहीं हुई. यह रकम कहां गई, इसका कोई हिसाब नहीं है.मार्च महीने में इस काम में शामिल भू-माफिया के 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.