गोरखपुर एम्स के डॉक्टरों का कमाल, मां के गर्भ के अंदर ही शिशु को चढ़ाया खून

गोरखपुर एम्स ने एक कमाल की उपलब्धि हासिल की है. यहां के डॉक्टर्स ने एक मां के गर्भ के अंदर ही शिशु को खून चढ़ाकर उसके जन्म लेने से पहले ही उसकी जान बचाई है. दरअसल, गर्भ में ही शिशु एनीमिया से पीड़ित हो चुका था. ऐसे में खून की कमी के चलते उसके हार्ट के फेल होने और गर्भ में मृत्यु का खतरा बढ़ गया था.

गोरखपुर एम्स में गर्भ में ही शिशु को रक्त चढ़ाकर बचाई जान Image Credit:

एम्स गोरखपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने कमाल कर दिखाया है. यहां के डॉक्टरों ने मां के गर्भ के भीतर ही शिशु को खून चढ़ाकर उसकी जान बचाने में बड़ी सफलता हासिल की है. फिलहाल, मां और शिशु दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं. मां के गर्भ में ही शिशु की जान बचाने वाली यह प्रक्रिया 11 मई 2026 को की गई.

महिला के 4 शिशुओं की गर्भ में पहले ही हो चुकी थी मौत

गोरखपुर एम्स की मीडिया प्रभारी डॉक्टर आराधना सिंह ने बताया कि कि कुशीशनगर की रहने वाली गर्भवती महिला उनके अस्पताल में आई थीं. वह चौथी बार प्रेग्नेंट हुई थीं. लेकिन उनकी पिछली गर्भावस्थाओं में RH Isoimmunization नामक गंभीर स्थिति शिशुओं की गर्भ में ही मृत्यु हो जाती थी.

गर्भ में ही शिशु एनीमिया से पीड़ित हो चुका था

डॉक्टर आराधना सिंह ने आगे बताया कि सबसे पहले उन्होंने एम्स की एंटीनैटल ओपीडी में परामर्श लिया. यहां उनकी जांच की गई. इस दौरान उनका इनडायरेक्ट कॉम्ब्स परीक्षण पॉजिटिव पाया गया. फिर उनकी नियमित तरीके से डॉप्लर अल्ट्रासाउंड निगरानी शुरू की गई. इस दौरान डॉक्टरों को जानकारी हुई की गर्भ में ही शिशु एनीमिया से पीड़ित हो चुका है. ऐसे में खून की कमी के चलते उसके हार्ट के फेल होने और गर्भ में मृत्यु का खतरा बढ़ गया.

शिशु की जान बचाने का था एकमात्र उपाय

ऐसे में डॉक्टरों ने मां के गर्भ के भीतर ही शिशु को खून चढ़ाने का फैसला किया. पहले इस तरह की सुविधाओं के लिए बड़े महानगरों में जाना पड़ता था. इस प्रक्रिया के दौरान गर्भ के भीतर पल रहे शिशु की नाल तक विशेष तकनीक की सहायता से पहुंचकर सीधे खून चढ़ाया जाता है. यह एक ऐसा आधुनिक इलाज है, जिससे उस शिशु का इलाज किया जा सकता है, जिसने अब तक जन्म ही नहीं लिया है.

गर्भ के भीतर ही शिशु को खून चढ़ाने की जटिल प्रकिया को मातृ एवं भ्रूण चिकित्सा की नोडल एवं स्त्री प्रसूति रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रीति बाला सिंह ने अंजाम दिया. प्रक्रिया के दौरान शिशु के दिल की धड़कन, रक्त प्रवाह और मां की स्थिति पर लगातार डॉक्टर्स की नजर थी.

संस्थान के निदेशक ने कहा- हमारे लिए गर्व का विषय

इतने जटिल ऑपरेशन को सफलता पूर्वक पूरा करने पर संस्थान की निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने पूरे प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, फीटल मेडिसिन टीम, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग, रेजिडेंट चिकित्सकों और नर्सिंग टीम को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि ये उपलब्धि संस्थान के लिए गर्व का विषय है.

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