कोर्ट ने खारिज किया था केस, फिर भी SDM का फर्जी साइन लगाकर पेशकार ने बना दिया फेक आदेश
कानपुर के नर्वल तहसील में कोर्ट से खारिज किए जा चुके एक केस में जमीन को औद्योगिक घोषित करने के लिए पेशकार द्वारा फर्जी आदेश जारी करने का मामला सामने आया है. इस आदेश में कथित तौर पर एसडीएम के फर्जी साइन किया गया. मामला खुलने के बाद पेशकार अनुज त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया है.
कानपुर की नर्वल तहसील में एक गंभीर प्रशासनिक अनियमितता का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है. न्यायालय द्वारा पहले ही खारिज किए जा चुके एक प्रकरण में भूमि उपयोग परिवर्तन का फर्जी आदेश तैयार कर उसे खतौनी में दर्ज कराने का प्रयास किया गया. मामले का खुलासा समय रहते होने से एक बड़े राजस्व घोटाले की आशंका टल गई.
कंप्यूटर ऑपरेटर की सतर्कता से खुला मामला
बिरहर गांव में 0.41 हेक्टेयर भूमि को कृषि से अकृषक औक औद्योगिक उपयोग के लिए घोषित करने संबंधी एक आदेश तहसील के कम्प्यूटर कक्ष में फीडिंग के लिए भेजा गया था. कंप्यूटर ऑपरेटर रोहित भदौरिया को आदेश संदिग्ध प्रतीत हुआ, जिसके बाद उन्होंने इसकी सूचना अधिकारियों को दी.
कोर्ट में पहले ही खारिज किया जा चुका था केस
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसील प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू कराई. जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित आवेदन आवश्यक शपथपत्र, सहमति पत्र तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के कारण न्यायालय द्वारा पहले ही निरस्त किया जा चुका था. इसके बावजूद उसी प्रकरण में भूमि उपयोग परिवर्तन का आदेश तैयार कर कंप्यूटर कक्ष भेज दिया गया.
जांच में आरोप सही पाए गए
उपजिलाधिकारी नर्वल विवेक कुमार मिश्रा ने स्वयं मामले की जांच की. जांच के दौरान पाया गया कि आदेश पर अंकित हस्ताक्षर उनके नहीं थे, बल्कि उनके हस्ताक्षरों को स्कैन कर फर्जी तरीके से आदेश पर लगाया गया था. साथ ही आदेश का प्रारूप भी न्यायालय द्वारा जारी किए जाने वाले नियमित आदेशों से भिन्न पाया गया. आरसीसीएमएस पोर्टल की जांच में भी संबंधित वाद के निरस्त होने की पुष्टि हुई.
पेशकार अनुज त्रिपाठी को किया गया निलंबित
जांच के दौरान उपजिलाधिकारी न्यायालय में तैनात वाचक एवं पेशकार अनुज त्रिपाठी से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन वह कोई संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं कर सका. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायालय की पत्रावलियों, अभिलेखों और आदेशों के सुरक्षित रखरखाव तथा गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी पेशकार की होती है. ऐसे में फर्जी आदेश तैयार कर उसे फीडिंग के लिए भेजे जाने के मामले में उनकी प्रथम दृष्टया संलिप्तता प्रतीत हुई.
पेशकार अनुज त्रिपाठी पर एफआईआर भी दर्ज
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर आरोपी पेशकार अनुज त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. साथ ही उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 336(3), 337 एवं 340(2) के तहत नर्वल थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है. दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी.