दिव्यांग कोटे में बड़ा खेल! नौकरी के लिए GF का बनाया दिव्यांग सर्टिफिकेट, 30 हजार में बैठाया सॉल्वर
कानपुर में दिव्यांग कोटे में बड़ा घोटाला सामने आया है. पुलिस ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर सरकारी नौकरी दिलाने वाले गिरोह को पकड़ा है. यह गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वरों का भी इंतजाम करता था. एक आरोपी ने अपनी प्रेमिका के लिए भी फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और उसके लिए सॉल्वर की व्यवस्था की. पुलिस इस बड़े रैकेट की गहन जांच कर रही है.
उत्तर प्रदेश के कानपुर में सचेंडी थाना पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में दिव्यांग कोटे में बड़े खेल का खुलासा हुआ है. यहां एक गिरोह सामान्य अभ्यर्थियों के फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र तैयार करवाता था. यही नहीं, इस कोटे के जरिए प्रतियोगी परीक्षा में सॉल्वर की भी व्यवस्था करता था. एटीएफ की टीम ने इस गिरोह के चार जालसाजों को अरेस्ट किया है. इनके पास से पुलिस ने पांच मोबाइल फोन, आइपैड, आधार और पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, दो एटीएम कार्ड, 2,750 रुपये नकद, परीक्षा से जुड़े दस्तावेज और एक कार बरामद की है.
पुलिस के मुताबिक 22 अगस्त को भैलामऊ स्थित परीक्षा केंद्र पर बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान की ओर से प्रोबेशनरी ऑफिसर और मैनेजमेंट ट्रेनी प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन हुआ था. इस परीक्षा के दौरान कुछ लोगों की संदिग्ध गतिविधियां नजर आईं. इसके बाद एक्शन में आई पुलिस ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है. पुलिस के मुताबिक केंद्र पर अवनीश यादव के लिए आशीष कुमार और अनुराधा कन्नौजिया के लिए बिहार निवासी राहुल कुमार सिन्हा सॉल्वर बनकर पहुंचे थे.
ऐसे खुला पूरा फर्जीवाड़ा
पुलिस की पूछताछ में इन दोनों ने कई अहम जानकारियां दी. अवनीश ने बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ है और स्नातकोत्तर तक पढ़ाई कर चुका है. इसके बावजूद नौकरी नहीं मिली तो वर्ष 2025 में करीब एक लाख रुपये खर्च कर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवा लिया था. पुलिस के मुताबिक इसमें मनोज कुमार यादव और शमशेर उर्फ शीलू सचान की भूमिका सामने आई है. जांच में पता चला कि अवनीश इससे पहले दो परीक्षाओं में सॉल्वर की मदद ले चुका है.
गर्लफ्रेंड का बनवाया फर्जी सर्टिफिकेट
इसी मामले में अंकित सचान का नाम भी सामने आया है. पुलिस के मुताबिक वह अपनी प्रेमिका को दिव्यांग कोटे से नौकरी दिलाना चाहता था. इसके लिए वर्ष 2024 में करीब 65 हजार रुपये देकर उसका दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया. बाद में परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए दस लाख रुपये में सौदा तय किया. राहुल के मोबाइल और आइपैड की जांच में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रवेश पत्र, लेखक सहायक से जुड़े दस्तावेज, प्रमाणपत्र और लेनदेन संबंधी बातचीत मिली है.
इन संदिग्धों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस अब शमशेर उर्फ शीलू सचान, मनोज कुमार यादव, सुरजीत कुमार, मनोरंजन, राजू गुप्ता, मनीष कुमार मिश्रा और राहुल यादव समेत अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है. डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, गिरोह ने इससे पहले किन-किन परीक्षाओं में इसी तरीके का इस्तेमाल किया, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है. जांच आगे बढ़ने के साथ और नाम सामने आने की संभावना है.