एक पोस्ट और चली गई कुर्सी… आकाश आनंद पर क्यों ट्रोल हो रही हैं मायावती?
3 सितंबर को लखनऊ में हुई बैठक में मायावती ने आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताया और बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखा. इसी बीच चर्चा है कि अगस्त में अंकित कुमार से जुड़े विवाद पर आकाश की फेसबुक पोस्ट ने मायावती की नाराजगी बढ़ाई थी. पोस्ट में उन्होंने जातिवाद और आरक्षण के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणियों का भी जिक्र किया था.
बहुजन समाज पार्टी में मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाए गए आकाश आनंद को पार्टी की अहम जिम्मेदारियों से दूर कर दिया गया है. लखनऊ में 3 सितंबर को हुई पार्टी की बैठक में मायावती ने आकाश को अभी राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताया. इसके बाद सोशल मीडिया पर मायावती को ट्रोल किया जा रहा है और सवाल उठ रहा है कि क्या आकाश की एक फेसबुक पोस्ट उनकी कुर्सी पर भारी पड़ गई?
कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी… कभी पार्टी के युवा चेहरे के तौर पर लॉन्च और अब एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी से बाहर… ये कहानी है आकाश आनंद की. 3 सितंबर को लखनऊ में बीएसपी की अहम बैठक हुई. मायावती ने साफ किया कि आकाश को अभी राजनीतिक तौर पर और परिपक्व होने की जरूरत है. यानी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी की कमान संभालने की बड़ी जिम्मेदारी फिलहाल आकाश के हाथ में नहीं होगी.
क्या है असली कहानी?
लेकिन सवाल ये क्या आकाश की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने उनकी कुर्सी छीन ली? इसका जवाब सीधे तौर पर ‘हां’ कहना मुश्किल है, क्योंकि मायावती ने आधिकारिक तौर पर आकाश को हटाने की वजह किसी एक पोस्ट को नहीं बताया है, लेकिन अगस्त में की गई एक पोस्ट के बाद आकाश और मायावती की राजनीतिक लाइन को लेकर चर्चा जरूर तेज हुई थी. मामला शुरू हुआ लखनऊ के दलित कैब ड्राइवर अंकित कुमार से जुड़े विवाद से.
आकाश ने किया था सवाल
अंकित ने आरोप लगाया कि उनकी कैब में सवार रेलवे कर्मचारियों ने एक दलित वरिष्ठ अधिकारी को लेकर जातिसूचक टिप्पणियां कीं. अंकित के मुताबिक विरोध में उन्होंने यात्रियों को बीच रास्ते उतार दिया. इसके बाद उनका दावा था कि Rapido ने उनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया. आकाश आनंद ने इसी मामले को सोशल मीडिया पर उठाया. उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी व्यक्ति की योग्यता पर सवाल है तो उसका नाम लिया जाए… पूरी जाति को बदनाम क्यों किया जा रहा है?
राष्ट्रीय बहस से जोड़ दिया
आकाश यहीं नहीं रुके. उन्होंने इस मामले को जातिवाद, सामाजिक सम्मान और आरक्षण के सवाल से जोड़ दिया और फिर आया वो हिस्सा, जिसने सियासी हलकों में सबसे ज्यादा हलचल मचा दी. आकाश ने आरक्षण को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणियों का संदर्भ दिया और सवाल उठाया कि अंकित जैसे दलित युवाओं के सवालों का जवाब कौन देगा. यानी एक स्थानीय विवाद को सीधे आरक्षण और जाति की राष्ट्रीय बहस से जोड़ दिया गया।
आकाश को पोस्ट हटानी पड़ी
दिलचस्प बात ये है कि मायावती भी आरक्षण के मुद्दे पर मोहन भागवत के बयानों को लेकर पहले हमला बोल चुकी थीं, लेकिन आकाश का अंदाज ज्यादा आक्रामक था. यहीं से सवाल उठा कि क्या आकाश की राजनीतिक शैली बीएसपी की रणनीति से अलग होती जा रही है? फिर आकाश की ये पोस्ट सोशल मीडिया से हट गई. पोस्ट हटने की वजह मायावती की नाराजगी थी. इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है.
अंकल पर भी बवाल
इसके बाद आई ‘अंकल’ वाली राजनीति. हाथरस की सभा में आकाश आनंद ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहकर संबोधित किया. आकाश ने इसकी वजह भी बताई. उन्होंने कहा कि वह करीब 30 साल के हैं… जबकि अखिलेश यादव करीब 50 के हैं, इसलिए उन्हें अंकल कहना स्वाभाविक है. अखिलेश यादव ने भी पलटकर जवाब दिया, लेकिन अखिलेश ने मुद्दे को ‘अंकल’ से निकालकर शिक्षा और आरक्षण के सवाल पर ला दिया.
तीसरी बार झटका
इसके बाद मायावती का बड़ा फैसला आया. 2024 के बाद ये तीसरी बार है जब आकाश आनंद के राजनीतिक सफर को बड़ा झटका लगा है. 2024 में विवादित भाषण के बाद मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक के पद और उत्तराधिकारी की भूमिका से हटा दिया था. बाद में वापसी हुई और अगस्त 2025 में उन्हें फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली. फिर हटा दिया गया. इसके बाद हाल में ही आकाश आनंद को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी से दूर दी गई थी.
राजनीतिक परिपक्व नहीं
मायावती ने इसके पीछे आकाश की राजनीतिक अपरिपक्वता को वजह बताया है. तर्क ये है कि विधानसभा चुनाव बेहद करीब हैं… ऐसे वक्त में संगठन की बड़ी जिम्मेदारी ऐसे नेता को देना सही नहीं होगा जिसे अभी और राजनीतिक अनुभव की जरूरत है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी है कि क्या आकाश की आक्रामक राजनीति मायावती की सियासी रणनीति से टकरा रही है? क्योंकि बीएसपी में अंतिम राजनीतिक नियंत्रण हमेशा मायावती के हाथ में रहा है.
मायावती हुईं ट्रोल
आकाश का राजनीतिक अंदाज… सीधे हमले… सोशल मीडिया पर सक्रियता.. और विपक्षी नेताओं पर तीखे बयान… क्या इसी वजह से बार-बार पार्टी नेतृत्व को उन्हें पीछे करना पड़ रहा है? आकाश आनंद से पद छीने जाने के बाद सोशल मीडिया में मायावती को ट्रोल किया जा रहा है. लोगों का कहना है कि सपा एक तरफ जेन-जी नेताओं को आगे बढ़ा रही है तो बसपा अपने जेन-जी नेता को बुजुर्ग होने का इंतजार कर रही है.
