‘विपक्षी एकता ने BJP को धूल चटाया…’, महिला आरक्षण बिल पर बोले अखिलेश, बताया लोकतांत्रिक जीत

अखिलेश यादव ने संसद में महिला आरक्षण बिल की हार को ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक जीत बताया. उन्होंने इसे भाजपा की जन-विरोधी और विभाजनकारी राजनीति की पराजय कहा. अखिलेश ने बिल को महिलाओं को बांटने और जाति जनगणना से बचने की भाजपा की साजिश बताया, खासकर पीडीए समाज की महिलाओं के खिलाफ. उन्होंने विपक्षी एकता की भूमिका पर जोर दिया.

अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस

संसद में महिला आरक्षण परिसीमन मिल गिर जाने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने इस बिल को जन विरोधी साजिश करार देते हुए कहा कि इस बिल का संसद में गिर जाना ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक जीत है. उन्होंने इसे भाजपा की जन-विरोधी और विभाजनकारी राजनीति पर जनता की भारी जीत बताया.

अखिलेश यादव ने कहा कि आज हम एक ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक जीत के अवसर पर मिल रहे हैं. जब सरकार की बदनीयत की हार हुई है और परिसीमन बिल पास नहीं हो पाया है. संसद में हार का मतलब होता है कि सरकार अब जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं करती है. ऐसे में सरकार को बने रहने का कोई हक़ नहीं है. विपक्ष ही अब सही मायने में जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व कर रहा है.

बीजेपी की मंशा पर उठाए सवाल

उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा की नकारात्मक राजनीति का आधार हमेशा से दरारवादी रहा है. भाजपा वाले सबसे पहले लोगों के बीच अविश्वास पैदा करते हैं, फिर उन्हें बांट कर आपस में लड़वाते हैं. अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपाई सरकार बचाने और सत्ता पाने के लिए कोई भी साजिश कर सकते हैं. अभी महिलाओं को बांटने की साजिश नाकाम हुई है.

महिलाओं में दरार डालने की थी साजिश

भाजपा इस बिल के जरिए महिलाओं की एकता में दरार डालना चाहती थी, लेकिन विपक्ष की एकजुटता ने भाजपा के मंसूबों को धूल चटा दी. उन्होंने कहा कि अब महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी. भाजपाई सोचते हैं जो पुरानी सोच की महिलाएं हैं, उन्हें अपनी ओर कर लें. ये टीवी सीरियल की आपसी राजनीति को असल ज़िंदगी में औरतों के बीच एक लाइन खींचने के लिए इस्तेमाल करना चाहते थे, जिससे महिला एकता न बन पाए.

पीडीए की महिलाओं के खिलाफ था बिल

अखिलेश यादव के मुताबिक भाजपा की सोच महिलाओं के प्रति सामंती है. यह तथाकथित महिला आरक्षण परिसीमन बिल 95% पीडीए समाज की महिलाओं के खिलाफ था. ये महिलाओं की शक्ति को बांट कर उन्हें बेहद कमजोर करने की साजिश थी. बीजेपी इस बिल के माध्यम से नारी को नारा बनाने की कोशिश कर रही थी. उन्होंने बीजेपी की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि हम महिला बिल के खिलाफ नहीं थे, लेकिन इनकी मंशा गलत थी. ये 2011 की जनसंख्या का आधार पर बिल लाना चाहते थे. जल्दबाजी में इस बिल को लाने का मकसद जनगणना ना कराना था. जनगणना होगी तो सबकी जाति बतानी पड़ेगी.

Follow Us