PCS अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद क्यों हुआ निलंबन, क्या कहता है नियम?

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ दुर्व्यवहार, उनके बटुकों के साथ मारपीट और यूजीसी के नए इक्विटी नियमों को सवर्ण विरोधी बताते हुए इस्तीफा भेजा. सरकार ने इसे अनुशासनहीनता मानकर अलंकार को तत्काल निलंबित कर दिया. अब ऐसे में सवाल उठता है कि अलंकार सिंह ने जब इस्तीफा दे दिया तो उनको सरकार ने निलंबित क्यों किया?

पीसीएस अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया (फाइल फोटो) Image Credit:

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कल दोपहर यानी 26 जनवरी को अपने पद इस्तीफा दे दिया. 2019 बैच के प्रांतीय सिविल सर्विस (PCS) के अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ दुर्व्यवहार और उनके बटुकों के साथ मारपीट के साथ ही यूजीसी के नए नियम को सवर्ण विरोधी बताते हुए राज्यपाल, प्रमुख सचिव नियुक्ति और जिलाधिकारी को इस्तीफा भेजा था. इसके बाद सरकार ने PCS अलंकार को निलंबित कर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि अलंकार के इस्तीफे के बाद सरकार उन्हें निलंबित कर सकती है या नहीं?

दरअसल, जब कोई प्रशासनिक अधिकारी अपने पद से इस्तीफा दे देता है तो वह कोई भी बयान दे सकता है. पद पर रहते हुए राज्य सरकार या नियमावली के खिलाफ कोई भी बयानबाजी नहीं कर सकता. अगर पद पर रहते हुए बयानबाजी करता है तो उस अफसर को निलंबित भी किया जा सकता है. यहां तक की बर्खास्त भी किया जा सकता है. सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के केस में अभी तक इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है. यानि अलंकार अग्निहोत्री अभी भी पद पर थे. ऐसे में सरकार ने उन्हें निलंबित करते हुए उनके खिलाफ जांच बैठा दी है.

अलंकार ने सरकार पर साधा था निशाना

अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा देने के बाद यूजीसी के नए नियम और शंकराचार्य के अपमान मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया. अलंकार ने कहा कि सरकार में ब्राह्मणों का अपमान हो रहा है. सरकार ने अनुशासन हीनता के मामले में उनको निलंबित कर दिया है और विभागीय कार्रवाई भी प्रचलित है. साथ ही जिलाधिकारी के कार्यालय से अटैच कर दिया गया है. सरकार के सूत्रों का दावा है कि अलंकार अग्निहोत्री को देर-सवेर सरकार बर्खास्त कर सकती है.

पूर्व मुख्य सचिव ने बताया नियम

इस मामले में पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने टीवी9 यूपी से बात करते हुए कहा, ‘जब कोई भी अधिकारी इस्तीफा देकर देने के बाद बोलता है तो उसका निलंबन नहीं हो सकता. क्योंकि पहले ही वह इस्तीफा दे चुका है और सरकार को इस्तीफा स्वीकार करना चाहिए. हां.. अगर इस्तीफा न दिया होता उसके पहले सरकार पर आरोप लगता या नियमावली के खिलाफ गलत आचरण करता है तो सरकार निलंबित भी कर सकती थी और बर्खास्त भी कर सकती थी. ऐसे में सरकार ने इस्तीफे के बाद भी निलंबित क्यों किया? यह मेरे समझ से परे है.’

निलंबन के खिलाफ कोर्ट जाएंगे अलंकार

वहीं, निलंबन का आदेश आने पर PCS अलंकार अग्निहोत्री का कहना है, ‘डीएम ने मुझे कहा था कि आप दो-तीन या चार दिन के लिए इस्तीफा वापस ले लीजिए… आपके सारे मामले सेटल कर दिए जाएंगे. मुझे मालूम था कि अगर इस्तीफा वापस लेता तो यह लोग अनुशासनहीनता के मामले में निलंबित कर देते और उसके बाद मुझे बर्खास्त भी कर देते. इसलिए मैंने इस्तीफा वापस लेने से मना कर दिया… अब जब इस्तीफा दे दिया तो उसके बाद निलंबन का कोई अधिकार नहीं है..मैं इसके खिलाफ में कोर्ट भी जाऊंगा.’