बदला गया जस्टिस अतुल श्रीधरन का रोस्टर, अब सिविल मामलों की करेंगे सुनवाई, बरेली नमाज मामले को लेकर सुर्खियों में थे

इलाहाबाद हाईकोर्ट के नए रोस्टर के मुताबिक जस्टिस अतुल श्रीधरन अब सिविल मामलों की सुनवाई करेंगे. यह बदलाव महज रुटीन नहीं माना जा रहा, क्योंकि जस्टिस श्रीधरन इन दिनों बरेली के आंवला क्षेत्र के मोहम्मदगंज गांव में नमाज प्रकरण में सख्ती को लेकर सुर्खियों में थे .

जस्टिस अतुल श्रीधरन ( फाइल फोटो)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में बेंचों का नया रोस्टर जारी किया है. अब जस्टिस अतुल श्रीधरन सिविल मामलों की सुनवाई करेंगे. यह बदलाव उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है.नए रोस्टर के मुताबिक जस्टिस अतुल श्रीधरन अब जस्टिस विवेक सरन के साथ मिलकर पारिवारिक अपीलों (Family Court Appeals) और सीनियर सिटीजन एक्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगे.

यह बदलाव महज रुटीन नहीं माना जा रहा, क्योंकि जस्टिस श्रीधरन इन दिनों बरेली के आंवला क्षेत्र के मोहम्मदगंज गांव में नमाज प्रकरण को लेकर सुर्खियों में थे .इस मामले में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने प्रशासन पर सख्ती दिखाई थी. अदालत ने न सिर्फ मुस्लिम युवक हसीन खान को 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए, बल्कि तत्कालीन बरेली डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य को तलब किया था.

क्या था बरेली नमाज प्रकरण?

बेंच ने कंटेंप्ट नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी थी कि निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने में बाधा डालना अदालत के पहले के आदेशों का उल्लंघन है. यह प्रकरण जनवरी 2026 से चल रहा था, जब मोहम्मदगंज गांव में निजी आवास पर सामूहिक नमाज पर रोक लगाने का आरोप लगा था. अदालत ने 11 मार्च 2026 को सुरक्षा आदेश दिए था. जस्टिस अतुल श्रीधरन मूल रूप से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज थे. अक्टूबर 2025 में उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट में किया गया था.

नौकरशाही में भी तरह-तरह की चर्चाएं

अब बरेली नमाज प्रकरण के साथ-साथ आपराधिक और प्रशासनिक मामलों की सुनवाई अब किसी अन्य पीठ द्वारा की जाएगी. इस बदलाव को लेकर उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं. फिलहाल, प्रशासन और पुलिस विभाग की नजरें बरेली नमाज प्रकरण की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं. लेकिन रोस्टर में जस्टिस अतुल श्रीधरन के जिम्मेदारियों में बदलाव को सामान्य तौर पर नहीं लिया जा रहा है.

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