लखनऊ से कहां गायब हो गए दो लाख बांग्लादेशी? पुलिस के सर्च में एक भी ना मिला, मेयर ने किया था दावा
लखनऊ पुलिस के तीन महीने के सर्च ऑपरेशन में मेयर के 'दो लाख बांग्लादेशी घुसपैठियों' के दावे की पोल खुल गई. झुग्गी-बस्तियों की गहन जांच के बावजूद एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला है. पुलिस ने सभी को नागरिकता प्रमाणित होने पर क्लीनचिट दी है. मेयर अब पुलिस की रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं.
उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ कमिश्नरेट की पुलिस तीन महीने तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद भी किसी घुसपैठिए की पहचान नहीं कर सकी है. झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले हरेक व्यक्ति की पहचान और दस्तावेजों की जांच के बाद यह ऑपरेशन फेल हो गया है. जबकि लखनऊ के मेयर ने दावा किया था कि राजधानी में दो लाख से अधिक घुसपैठिए हैं. इसके बाद ही संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था की निगरानी में इस ऑपरेशन को शुरू किया गया था.
इस ऑपरेशन के तहत सभी पांचों जोन में अलग-अलग इलाकों में पुलिस टीम भेजकर झुग्गी झोपड़ियों की जांच कराई गई. वहां मिले हरेक व्यक्ति की नागरिकता देखी गई. इसमें पता चला कि यह की झुग्गियों में रहने वाले ज्यादातर लोग असम के हैं, लेकिन इनमें एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला, जो बांग्लादेश से आया हो. पुलिस के मुताबिक इस अभियान में नागरिकता प्रमाणित होने के बाद सभी लोगों को क्लीनचिट दे दी गई है. हालांकि यह सर्च ऑपरेशन अभी जारी है.
मेयर ने किया था ये दावा
राजधानह लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने पिछले साल दावा किया था कि राजधानी में दो लाख से भी अधिक संदिग्ध लोग रहे हैं. यही नहीं, उन्होंने इन सभी लोगों को बांग्लादेशी और रोहिग्यां भी बताया था. इसी प्रकार अंदेशा जताते हुए वह खुद गोमती नगर की झुग्गियों में जाकर लोगों के दस्तावेज खंगालते भी नजर आई थीं. इसी बीच एटीएस के इनपुट पर लखनऊ पुलिस ने एक महिला को अरेस्ट भी किया था. इसके महिला के पास कई नकली आधार कार्ड एवं अन्य दस्तावेज मिले थे.
अब क्या कह रहीं मेयर?
शहर में पुलिस के सर्च ऑपरेशन और अब तक सामने आए परिणामों पर मेयर सुषमा खर्कवाल ने गोल-मोल जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि पुलिस ने क्या जांच की और क्या रिपोर्ट तैयार किया है. उन्होंने पहले पुलिस सर्च रिपोर्ट लेकर आए तो इस पर आगे की बात होगी. उधर, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अब इस ऑपरेशन के तहत मुखबिर तंत्र को एक्टिव किया गया है.
