आम्रपाली ग्रुप मामले में ED का एक्शन, मौर्य उद्योग की 100 करोड़ की संपत्ति कुर्क
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम्रपाली ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. मौर्य उद्योग लिमिटेड की करीब 100 करोड़ की अचल संपत्ति कुर्क की है. यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई, जहां होमबायर्स के फंड का दुरुपयोग कर धन शोधन किया गया था.
प्रवर्तन निदेशालय (ED), लखनऊ कार्यालय ने आम्रपाली समूह मामले में बड़ी कार्रवाई की है. PMLA के तहत ₹99.26 करोड़ की अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है. इन संपत्तियों में सुरेका समूह की संस्थाओं में से एक, मेसर्स मौर्य उद्योग लिमिटेड के कार्यालय और कारखाने की जमीन और भवन शामिल हैं. इनके प्रमोटर नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका हैं.
ED ने गौतम बुद्ध नगर, ईओडब्ल्यू, दिल्ली पुलिस के साथ दर्ज कई एफआईआर के आधार पर और पीड़ित घर खरीदारों द्वारा दायर याचिकाओं पर जांच शुरू की थी. आरोप थे कि आम्रपाली ग्रुप ने घर खरीदने वालों से बड़ी रकम इकट्ठा की, तय समय में फ्लैट का कब्ज़ा नहीं दिया, और फर्जी तरीके से खरीदारों के पैसे का गलत इस्तेमाल किया.
घर खरीदने वालों के पैसे दूसरी जगह लगा दिए
ED की जांच से पता चला कि आरोपियों, उनके साथियों और प्रमोटरों, यानी आम्रपाली ग्रुप के डायरेक्टर अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार ने मेसर्स मौर्य उद्योग लिमिटेड और मेसर्स जोतिंद्र स्टील एंड ट्यूब्स लिमिटेड के डायरेक्टर नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका के साथ मिलकर घर खरीदने वालों के पैसे दूसरी जगह लगा दिए.
TMT बार और कंस्ट्रक्शन मटीरियल खरीदने की आड़ में यह एक साजिश के तहत की गई. यह पैसा शेल कंपनियों और नकली सप्लायरों के ज़रिए भेजा गया, ज़्यादातर कैश में निकाला गया, और इस तरह खर्च किया गया जिसे वापस नहीं लिया जा सकता था, जिससे क्राइम से हुई कमाई (POC) बनी और उसे लॉन्ड्र किया गया.
अबतक कुल 303.08 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच
पता चला है कि ₹110.39 करोड़ की रकम मेसर्स मौरिया उद्योग लिमिटेड को डायवर्ट की गई थी, जो आम्रपाली के घर खरीदने वालों से इकट्ठा किए गए पैसे से बनाया गया POC दिखाता है. क्योंकि ओरिजिनल POCs एक्सपायर हो गए थे और अब सीधे अटैचमेंट के लिए उपलब्ध नहीं थे, इसलिए ED ने POCs को सुरक्षित करने के लिए प्रॉपर्टीज़ को अटैच किया है.
इससे पहले, ED ने आम्रपाली ग्रुप के डायरेक्टर अनिल शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार, स्टैच्युटरी ऑडिटर अनिल मित्तल और CFO चंदर प्रकाश वाधवा को गिरफ्तार किया था. अब तक, ED ने इस मामले में छह प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट फाइल की हैं, जिसमें 33 लोगों और एंटिटीज़ को आरोपी बनाया गया है. जबकि कुल 303.08 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच की गई हैं.
