‘आजम, अतीक और मुख्तार…’ विधानसभा चुनाव से UP में क्यों लगे ये पोस्टर? जानें सियासी मायने

यूपी में 'आजम, अतीक, मुख्तार' नाम वाले पोस्टर ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. ये पोस्टर आगामी चुनावों में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश मानी जा रही है. माना जा रहा है कि एक बार फिर 'माफिया राज' का मुद्दा गरमाएगा.

यूपी में लगे विवादित पोस्टर Image Credit:

राजधानी लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में लगा एक पोस्टर खूब धूम मचा रहा है. इस पोस्टर में लिखा है कि ‘आजम, अतीक और मुख्तार… यही चलाते थे सरकार’. इसके अलावा एक और पोस्टर है, जिसपर लिखा है कि ‘माफिया के अखिलेश, अखिलेश के माफिया’. इस पोस्टर को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है. अभी यह साफ नहीं हो सका है कि ये पोस्टर किसने लगवाए, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले इन्हीं तीन नामों का उल्लेख करते हुए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी को घेरने की कोशिश की थी.

उन्होंने विधिवत नारा दिया था कि ‘अखिलेश के तीन यार, आजम अतीक और मुख्तार’. बता दें कि इन तीनों में से पूर्वांचल के माफिया डॉन अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की मौत हो चुकी है. वहीं आजम खान अभी जेल में हैं. प्रदेश में लगाए गए इन पोस्टरों के जरिए सीधे सपा सुप्रीमो अखिलेश पर सवाल उठाते हुए उन्हें घेरने की कोशिश की गई है. माना जा रहा है कि ये पोस्टर भी आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए लगाए गए हैं.

क्या फिर गर्माएगा माफिया का मुद्दा?

जिस तरह से प्रदेश भर में ये पोस्टर लगाए गए हैं, माना जा रहा है कि यूपी में होने वाले आगामी चुनावों में एक बार फिर माफिया का मुद्दा गरमा सकता है. बीजेपी ने लोकसभा चुनावों के दौरान भी समाजवादी पार्टी पर माफिया कनेक्शन का आरोप लगाते हुए मुद्दे को गरमाने की कोशिश की थी. खुद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने आजम, अतीक और मुख्तार का नाम लेते हुए सपा सुप्रीमो अखिलेश को घेरने की कोशिश की थी. यही नहीं यूपी में जंगलराज और माफिया राज का आरोप लगाया था.

लोकसभा चुनाव में वायरल हुए थे नारे

2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी बीजेपी के कुछ नारे सोशल मीडिया में खूब वायरल हुए थे. इसमें कहा गया था कि ‘समाजवादी पार्टी गुंडों, अपराधियों और माफिया की मां है’ इसके अलावा ‘जिस गाड़ी में एसपी का झंडा, उसमें बैठा गुंडा’. लोगों ने इन नारों को हाथों हाथ लिया. माना जा रहा है कि इन नारों के जरिए बीजेपी समाजवादी पार्टी के खिलाफ नरेटिव सेट करने में सफल रही थी.

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