पिता का संघर्ष देख बेटियों ने लिया संकल्प, एक बनी IAS तो दूसरी CBI अफसर; बिना कोचिंग हासिल किया मुकाम

लखनऊ में कैब ड्राइवर उपेंद्र गुप्ता की बेटियां IAS और CBI अफसर बनीं हैं. पिता के संघर्ष को देख उन्होंने बिना किसी कोचिंग के सेल्फ-स्टडी से यह मुकाम हासिल किया है. सीमित संसाधनों में भी दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में सफलता पाई, जो आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है.

लखनऊ के कैब ड्राइवर उपेंद्र गुप्ता Image Credit:

उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ की सड़कों पर कैब चलाने वाले उपेंद्र गुप्ता का घर खुशियों से भर गया है. ऐसा हो भी क्यों नहीं, उनकी एक बेटी आईएएस बनी है तो दूसरी सीबीआई ऑफिसर. टैक्सी कैब चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण और अपनी बेटियों को पढ़ाई का माहौल देने वाले उपेंद्र ने बड़ी मुफलिसी में दिन काटे हैं. वह तो खुद ज्यादा नहीं पढ़ पाए, लेकिन अब उनकी बेटियों ने उनका सपना पूरा कर दिया है. वो भी बिना कोचिंग के.

उपेंद्र गुप्ता के मुताबिक उनकी बेटियों ने उनका संघर्ष देखा, देखा कि कैसे वह एक-एक पाई जोड़कर घर में राशन पानी से लेकर उनके लिए कॉपी किताब की व्यवस्था कर रहे हैं. यही देखकर उनकी बेटियों ने भी संकल्प लिया कि सीमित संसाधनों में ही वह देश की सबसे बड़ी नौकरी हासिल करेंगी और आज उनकी बेटियों ने इसे करके दिखा भी दिया है. उन्होंने कहा कि आज के जमाने में IAS या CBI जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी के लिए लोग दिल्ली-प्रयागराज जैसे शहरों में महंगी कोचिंग करते हैं, उनकी बेटियों ने उनके संघर्ष को ही अपनी कोचिंग बना ली.

खुशी के साथ छलका दर्द

उपेंद्र गुप्ता की एक बेटी का चयन पहले ही आईएएस में हो गया था. अब दूसरी बेटी का चयन सीबीआई में हुआ तो उनकी खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. बेटी के रिजल्ट पर उपेंद्र भावुक हो गए. कहा कि मुझसे बड़ा खुशनसीब कौन होगा, आखिर उनकी बेटियों ने उनका सपना पूरा कर ही दिया. उपेंद्र के मुताबिक वह खुद ज्यादा नहीं पढ़ पाए, मजबूरी में उन्हें टैक्सी चलाना पड़ा, लेकिन वह नहीं चाहते थे कि उनकी बेटियों को पढ़ाई की राह में कोई रोड़ा आए.

ऐसे हासिल किया मुकाम

उपेंद्र ने अपनी बेटियों की सफलता की कहानी खुद बयां की है. बताया कि संसाधन कम थे, इसलिए उनकी बेटियों ने सेल्फ स्टडी को ही हथियार बना लिया. अटूट संकल्प और लगातार मेहनत की और आज उस मुकाम को हासिल किया, जो देश के हरेक युवा का सपना होता है. उन्होंने कहा कि कि उनकी बेटियां हमेशा किताबों में ही खोई रहती थीं. सफलता हासिल करने तक उन्हें बाहरी दुनिया के चकाचौंध से कोई वास्ता ही नहीं था.

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