यूपी के पंचायत चुनाव में पहली बार ‘ट्रिपल टेस्ट’ के जरिए तय होगा OBC आरक्षण, जानें क्या है ये फॉर्मूला

यूपी के पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले को अपनाया जाएगा. यह फार्मूला अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए कोर्ट का एक कड़ा विधिक पैमाना है. इसके तहत राज्य सरकार को आरक्षण लागू करने से पहले तीन मुख्य शर्तों (तीन टेस्ट) को अनिवार्य रूप से पालन करना होता है

यूपी पंचायत चुनाव ( प्रतीकात्मक तस्वीर) Image Credit:

योगी सरकार ने पंचायत चुनाव को देखते हुए ‘समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ के गठन की मंजूरी दे दी है.आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया इस महीने के अंत तक की जा सकती है. आयोग का कार्यकाल 6 महीने तय किया गया है. इस बार ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण तय करने के लिए अलग नियमों को अपनाया जाएगा. अबकी बार ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले के तहत इस आरक्षण को तया किया जाएगा.

तीन शर्तों का पालन करना होता है

ट्रिपल टेस्ट फार्मूला अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए कोर्ट का एक कड़ा विधिक पैमाना है. इसके तहत राज्य सरकार को आरक्षण लागू करने से पहले तीन मुख्य शर्तों (तीन टेस्ट) को अनिवार्य रूप से पालन करना होता है. पहली शर्त ये है कि राज्य सरकार को एक विशेष और समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करना होता है. इसमें निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति, प्रभाव और उसकी समकालीन स्थिति की जांच और अध्ययन करना होता है.

दूसरी शर्त ये है कि जमीनी और अनुभवजन्य आंकड़ों के मुताबिक स्थानीय निकायवार ओबीसी वर्ग के लिए सीटों के आरक्षण का सटीक प्रतिशत तय किया जाए. तीसरी शर्त ये है कि किसी भी स्थानीय निकाय अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को मिलाकर दिया जाने वाला कुल आरक्षण किसी भी स्थिति में कुल सीटों से 50 प्रतिशत से अधिक ना हो.

ऐसा नही करने पर ओबीसी सीटों को ‘सामान्य श्रेणी’ का माना जाएगा

अगर कोई भी सरकार ट्रिपल टेस्ट के मानकों को पूरा किए बिना या आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनाव कराती है तो ओबीसी सीटों को ‘सामान्य श्रेणी’ की सीट मानकर ही चुनाव कराना होगा. दरअसल, कोर्ट का मानना है कि शिक्षा में मिलने वाला आरक्षण और राजनीति में मिलने वाला प्रतिनिधित्व अलग-अलग चीजें है. राजनीतिक पिछड़ेपन को साबित करने के लिए सरकार के पास हाल-फिलहाल के आंकड़े जरूरी है, ताकि इसका लाभ जरूरतमंदों को दिया जा सके.

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