पंचायती जमीन पर अतिक्रमण हटाने में क्या मुश्किल? HC ने साफ बताया नियम, कहा- लंबी ना हो प्रक्रिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायती जमीन से अवैध कब्जे हटाने के लिए महत्वपूर्ण फैसला दिया है. अब बेदखली के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया की जरूरत नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत त्वरित कार्रवाई की जाएगी. इससे तालाबों, चरागाहों और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने में तेजी आएगी.
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों की जमीन पर अवैध कब्जों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत पारित बेदखली आदेश को लागू कराने के लिए लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया की कोई जरूरत नहीं है. इसके लिए धारा 67 की कार्यवाही अपने आप में संक्षिप्त प्रक्रिया है.
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश पूजा देवी की जनहित याचिका पर सुनाया. कोर्ट ने कहा कि धारा 67(3) के तहत अतिक्रमणकारी को जमीन से बेदखल करने के लिए आवश्यक बल का प्रयोग किया जा सकता है. साथ ही अतिक्रमण के लिए निर्धारित प्रतिकर की वसूली भू-राजस्व के बकाये की तरह की जा सकती है. उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों में अतिक्रमण हटाने और बेदखली आदेश के अनुपालन की पूरी व्यवस्था पहले से मौजूद है.
ऐसे मामलों में तुरंत हो कार्रवाई
कोर्ट के मुताबिक धारा 67 के तहत कार्रवाई पूरी होने के बाद उसके अनुपालन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता की लंबी निष्पादन प्रक्रिया अपनाना उचित नहीं है. अतिक्रमण हटाने तथा प्रतिकर की वसूली के लिए पर्याप्त वैधानिक व्यवस्था पहले से है. इसलिए बेदखली आदेश के क्रियान्वयन को अनावश्यक रूप से जटिल या लंबा नहीं बनाने के बजाय तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए.
क्या होगा असर?
हाईकोर्ट के इस फैसले का सीधा असर ग्राम पंचायत, ग्राम सभा और सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर अतिक्रमण के मामलों पर पड़ेगा. धारा 67 के तहत सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा बेदखली का आदेश पारित होने के बाद उसके क्रियान्वयन में लंबी अदालती प्रक्रिया का सहारा लेकर देरी करने की गुंजाइश कम होगी. इससे तालाब, चरागाह, रास्ते और अन्य सार्वजनिक उपयोग की पंचायती भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई को गति मिलने की उम्मीद है.