पिता बनाना चाहते थे डॉक्टर, बेटा बना उसी का कातिल… लखनऊ के अक्षत सिंह की पूरी कहानी
लखनऊ में शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या ने सबको चौंका दिया. वह बेटे अक्षत सिंह को डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन बेटे का पढ़ाई में मन नहीं लगता था. इसी बात को लेकर पिता पुत्र में विवाद हुआ और अक्षत ने पिता की गोली मारकर हत्या कर दी. 30 सेकंड के आवेश में हुई वारदात के बाद अक्षत ने शव को 4 दिन तक ठिकाने लगाने की कोशिश की.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की हत्या का पूरा सच सामने आ चुका है. यह सच बेहद खौफनाक होने के साथ समाज के लिए एक सबक भी है. पुलिस की जांच में साफ हो चुका है कि यह वारदात महज 30 सेकंड के आवेश में हुआ, लेकिन इसके बाद चार दिन अपराध को छुपाने की कोशिश में लग गए. पुलिस ने इस मामले में मानवेंद्र सिंह के बेटे अक्षत को प्रताप सिंह को अरेस्ट कर लिया है. इस प्रसंग में पेश है वारदात और इसे अंजाम देने वाले अक्षत की पूरी कहानी.
लखनऊ के आशियाना सेक्टर एल में रहने वाले शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह मेडिकल लाइन से जुड़े थे और 4 पैथालॉजी सेंटरों का संचालन करते थे. वह चाहते थे उनका बेटा डॉक्टर बने. शराब के कारोबार और मेडिकल लाइन से मानवेंद्र सिंह ने भले ही काफी पैसा कमाया, लेकिन वह वह बेटे बेटे अक्षत प्रताप सिंह को सही लाइन नहीं पकड़ा पाए. पिता के दबाव में अक्षत नीट की तैयारी तो करने लगा, दो बार परीक्षा में भी बैठा, लेकिन सफलता से काफी दूर खड़ा था. ऐसे में उसने हार मान ली और पिता से कह दिया कि वह अब और पढ़ाई नहीं कर सकता.
पल भर के आवेश में बड़ी वारदात
यही बात मानवेंद्र सिंह को अखर गई. आवेश में आकर उन्होंने तुरंत अपना राइफल निकाल लिया. अक्षत ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि पिता के हाथ में राइफल देखते ही वह भी आवेश में आ गया और छीना झपटी में गोली चल गई. गोली मानवेंद्र सिंह के सिर में लगी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई. फायरिंग की आवाज सुनकर दूसरे कमरे में पढ़ाई कर रही अक्षत की छोटी बहन कृति बाहर आ गई, उसे देखकर अक्षत को पकड़े जाने का डर सताने लगा. उसने वही राइफल तानकर कृति का ना केवल मुंह बंद कर दिया, बल्कि उसे भी चार दिनों तक एक कमरे में बंद कर के रखा.
4 दिन में ठिकाने लगाया शव
यह पूरी वारदात मकान के तीसरी मंजिल पर हुई. वारदात के वक्त दूसरी मंजिल पर मानवेंद्र सिंह के छोटे भाई अरविंद सिंह भी रहते हैं, लेकिन उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी और अगले दिन तड़के उठकर वह परिवार के साथ पैत्रिक गांव जालौन चले गए थे. इसके बाद आरोपी ने शव को गोमती नदी में बहाने का प्लान बनाया, लेकिन शव काफी भारी था. ऐसे में वह तीसरी मंजिल से पिता के शव को घसीटते हुए ग्राउंड फ्लोर पर लाया. इसके बाद बारा से एक नीला ड्रम और एक आरी खरीद कर लाया. फिर उसने शव के कई टुकड़े किए. इसके बाद दोनों हाथ व पैरों को पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिया. वहीं सिर सहित धड़ को ड्रम में डालकर पैक कर दिया
ऐसे हुआ खुलासा
पुलिस के मुताबिक वारदात के बाद अक्षत बेचैन था. वह बार बार घर के अंदर बाहर आ जा रहा था. यह देखकर पड़ोसियों को शक हुआ. लोग पूछताछ करने लगे तो बताया कि 19 फरवरी को उसके पिता दिल्ली गए थे, अभी लौटे नहीं है. कहा कि उसने पुलिस को शिकायत भी दी है, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही. इसके बाद पड़ोसी उसे लेकर एडीसीपी के पास भी पहुंचा. चौथे दिन अक्षत ने खुद अपने पिता के दोस्त को फोन किया और कहा कि पापा ने सुसाइड कर लिया है. इसके बाद वह मौके पर पहुंचे और मामले का खुलासा हुआ.
खूब किया गुमराह
पड़ोसियों और पुलिस को आरोपी अक्षत ने गुमराह करने की खूब कोशिश की, लेकिन सीसीटीवी ने सारे राज खोल दिए. सीसीटीवी में 19 फरवरी की रात करीब 12 बजे मानवेंद्र अपनी कार से घर में आते हुए दिखे. इसके बाद उनके घर से बाहर जाने का कोई फुटेज नहीं मिला. बाद में खुद अक्षत कार में बाहर जाते नजर आया. पुलिस ने लोकेशन निकलवाई तो पता चला कि पिता के शव के टुकड़े ठिकाने लगाने के लिए सदरौना गया था.
अमीर बाप की बिगड़ी औलाद अक्षत
पुलिस के मुताबिक मृतक मानवेंद्र सिंह के पिता सुरेंद्र पाल सिंह यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर से रिटायर हैं. वह जालौन में रहते हैं. मानवेंद्र का अपना कारोबार भी ठीक चल रहा था और उन्होंने काफी प्रापर्टी बनाई थी. घर में पैसे और वैभव की कोई कमी नहीं थी. ऐसे में अक्षत ने गलत राह पकड़ ली थी. उसका पढ़ाई में बिलकुल भी मन नहीं लगता था. यहां तक कि उसने अपने ही घर में चार महीने पहले गहने और नगदी आदि की चोरी किया था. इस मामले में मानवेंद्र सिंह ने पहले अपनी कामवाली के खिलाफ शिकायत दी, लेकिन बाद में मामले का खुलासा होने के बाद शिकायत वापस ले ली थी.
