राम मंदिर चढ़ावा चोरी के 8 आरोपी भेजे गए जेल, हुई थी 79.85 लाख रुपये की बरामदगी
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा अनियमितता मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. पुलिस ने फिलहाल कस्टडी रिमांड नहीं मांगी, लेकिन सोमवार को रिमांड के लिए आवेदन किए जाने की संभावना है. जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ, बरामद 79.85 लाख रुपये के स्रोत, बैंक लेन-देन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के लिए रिमांड जरूरी हो सकती है.
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा अनियमितता मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पुलिस ने फिलहाल किसी भी आरोपी की पुलिस कस्टडी रिमांड नहीं मांगी. हालांकि सूत्रों के मुताबिक, अदालत की छुट्टियां समाप्त होने के बाद सोमवार को पुलिस रिमांड के लिए आवेदन दाखिल कर सकती है. सभी आरोपियों को ड्यूटी मजिस्ट्रेट निवेदिता की अदालत में पेश किया गया.
आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, जिसके बाद पुलिस सभी आरोपियों को लेकर अयोध्या जिला न्यायालय से जेल के लिए रवाना हो गई. पुलिस सूत्रों के अनुसार, फिलहाल आरोपियों को सीधे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और पुलिस ने शुक्रवार को उनकी कस्टडी रिमांड की मांग नहीं की. अब संभावना है कि सोमवार को नियमित अदालत खुलने के बाद विवेचक पुलिस रिमांड के लिए आवेदन दाखिल करेगी.
जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने, बरामद रकम के स्रोत और उसके वितरण की कड़ियों को जोड़ने के लिए पुलिस रिमांड जरूरी हो सकती है. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मोबाइल फोन, बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेजों के संबंध में भी पूछताछ की जा सकती है.
आठ आरोपियों में छह बैंक के आउटसोर्स कर्मी
इस मामले में गिरफ्तार किए गए कुल आठ आरोपियों में से छह बैंक से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारी हैं, जिन्हें मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना (कैश काउंटिंग) के लिए ड्यूटी पर लगाया गया था. इनके अलावा दो आरोपी ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी हैं.
बैंक से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारी
अनुकल्प मिश्र
अविनाश शुक्ला
करुणेश पांडेय
मनीष यादव
लवकुश मिश्र
रमा शंकर मिश्र
ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी
टिन्नू यादव (राम शंकर)
सुभाष श्रीवास्तव
जांच में अब यह पता लगाया जा रहा है कि कथित गबन की पूरी साजिश कैसे रची गई, इसमें किसकी क्या भूमिका रही और क्या इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे.
सात आरोपियों से हुई नकदी की बरामदगी
पुलिस जांच में अब तक सबसे बड़ी सफलता करीब 79 लाख 85 हजार रुपये की बरामदगी रही है. जांच एजेंसियों के अनुसार यह रकम सात आरोपियों के कब्जे से बरामद की गई है. दिलचस्प बात यह है कि ट्रस्ट कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव के पास से कोई नकदी बरामद नहीं हुई है. हालांकि जांच एजेंसियों का आरोप है कि वे कथित षड्यंत्र का हिस्सा थे और पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है.
SIT की जांच लगातार जारी
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) पूरे मामले की जांच कर रहा है. SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ही पहली एफआईआर दर्ज की गई थी. इसके बाद लगातार पूछताछ, छापेमारी और गिरफ्तारियों की कार्रवाई की गई. जांच के दौरान कई कर्मचारियों से पूछताछ की गई और दस्तावेजों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी खंगाले गए. पुलिस का दावा है कि बरामद नकदी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आई हैं.
आगे क्या होगी कार्रवाई?
पुलिस अब इस पूरे मामले की वित्तीय जांच को और आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है. अगर अदालत सोमवार को पुलिस रिमांड मंजूर करती है तो आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जाएगी. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास करेंगी कि क्या कथित गबन लंबे समय से किया जा रहा था या यह हाल के दिनों में हुआ? इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि क्या इस पूरे प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा अन्य लोगों की भी भूमिका रही है.
