राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय और गोपाल राव से हुई पूछताछ, तीसरे दिन भी अयोध्या में रहेगा SIT का डेरा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में लगातार दूसरे दिन एसआईटी की लखनऊ में जांच जारी रही. इस दौरान एसआईटी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और व्यवस्थापक गोपाल राव से भी पूछताछ की. इस दौरान कर्मचारियों की नियुक्ति, निगरानी तंत्र, जिम्मेदारियों के निर्धारण, मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और धनराशि प्रबंधन से संबंधित जानकारी ली गई.

चंपत राय और गोपाल राव

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से धनराशि में कथित गबन और चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल एसआईटी ने मंगलवार यानी 16 जून को लगातार दूसरे दिन भी अयोध्या में डेरा डाले रखा. जांच टीम ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, व्यवस्थापक गोपाल राव सहित नकदी गणना प्रक्रिया से जुड़े कई कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की. इस दौरान दान की राशि के संग्रहण, सुरक्षा व्यवस्था, गणना प्रक्रिया और उससे जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई गई.

एसआईटी का नेतृत्व कर रहे लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के साथ आईजी लखनऊ किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार ने अलग-अलग स्तर पर पूछताछ की. जांच को गोपनीय बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों को प्रक्रिया से दूर रखा गया.

दानपात्रों से लेकर रिकॉर्ड तक की जांच

जांच दल ने मंदिर परिसर में लगे दानपात्रों का निरीक्षण किया, उनकी संख्या और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की तथा नकदी गणना से संबंधित समस्त रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए. टीम ने सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर, नकदी जमा करने की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की भी गहन पड़ताल की.

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी यह समझने का प्रयास कर रही है कि दानपात्रों से निकाली जाने वाली धनराशि किस स्तर पर और किन-किन लोगों की निगरानी में गुजरती है तथा कथित गड़बड़ी की संभावना किस चरण में उत्पन्न हुई. साथ ही दानपात्रों से नकदी निकलने से लेकर बैंक में जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही किस स्तर पर तय की गई थी और निगरानी तंत्र कितना प्रभावी था.

आभूषण कक्ष का भी किया निरीक्षण

एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत ने रामलला के गर्भगृह के सामने स्थित उस विशेष कक्ष का भी निरीक्षण किया, जहां श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए आभूषण और अन्य बहुमूल्य धातुएं सुरक्षित रखी जाती हैं. इस कक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी तिवारी से भी विस्तृत पूछताछ की गई. जांच दल ने सुरक्षा व्यवस्था, अभिलेखों के रखरखाव और कीमती वस्तुओं के संरक्षण संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी जुटाई.

चंपत राय और गोपाल राव से पूछे गए अहम सवाल

मंगलवार सुबह करीब साढ़े दस बजे मंदिर परिसर पहुंची एसआईटी ने परकोटे के बाहर स्थित ग्रीन हाउस में बैठकर पूछताछ शुरू की. सबसे पहले महासचिव चंपत राय से नकदी गणना में लगे कर्मचारियों की नियुक्ति, निगरानी तंत्र और जिम्मेदारियों के निर्धारण को लेकर सवाल किए गए. इसके बाद व्यवस्थापक गोपाल राव से मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और धनराशि प्रबंधन से संबंधित जानकारी ली गई.

40 कर्मचारी करते हैं नकदी गणना का काम

पूछताछ के दौरान एसआईटी को बताया गया कि दानपात्रों से प्राप्त नकदी की गणना में ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक और कलेक्शन एजेंसी से जुड़े लगभग 40 कर्मचारी शामिल रहते हैं. ये कर्मचारी दो शिफ्टों में कार्य करते हैं. जांच में यह भी सामने आया कि कलेक्शन एजेंसी की जिम्मेदारी केवल दानपात्रों से नकदी निकालकर उसे यात्री सुविधा केंद्र स्थित गोपनीय कक्ष तक पहुंचाने की होती है.

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