राम मंदिर: अब ट्रस्ट का होगा आधिकारिक प्रवक्ता, जानिए और क्या-क्या हुआ फैसला?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर चर्चा हुई, लेकिन ट्रस्ट ने साफ किया कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट अभी नहीं मिली है, इसलिए कोई निष्कर्ष या निर्णय नहीं लिया गया. ट्रस्ट ने आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करने का फैसला किया, जबकि सीईओ चयन के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय दिया गया. ट्रस्ट ने कहा कि विवादों के बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या और आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है.

अयोध्या स्थित राम मंदिर Image Credit: AI Generated

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में आज राम मंदिर के चढ़ावे की कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े मामलों पर कई अहम फैसले लिए गए. हालांकि, ट्रस्ट का कहना है कि विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए इस विषय पर फिलहाल कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा. बैठक में चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ हुए समझौते (MOU), भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर चर्चा हुई.

बैठक के दौरान ट्रस्ट ने साफ किया कि चढ़ावे की गिनती में कथित अनियमितताओं से संबंधित मामले की जांच अभी जारी है. चूंकि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट अभी तक ट्रस्ट को नहीं मिली है, इसलिए इस विषय पर किसी प्रकार की औपचारिक चर्चा या निर्णय नहीं लिया गया. ट्रस्ट का कहना है कि अंतिम जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आवश्यक कार्रवाई और समीक्षा की जाएगी. बैठक में चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया.

CCTV और सोने-चांदी के चढ़ावे पर चर्चा

ट्रस्ट ने बताया कि चढ़ावा गिनती कक्ष सहित सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की गई. ट्रस्ट के अनुसार सुरक्षा अधिकारियों को पहले से ही इन कैमरों की पूरी पहुंच उपलब्ध कराई गई है ताकि हर गतिविधि की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मंदिर में प्राप्त होने वाले सोने और चांदी के चढ़ावे की मात्रा और शुद्धता की वैज्ञानिक जांच की वर्तमान व्यवस्था लगातार जारी रखी जाएगी.

SBI के साथ व्यवस्था की समीक्षा

राम मंदिर में नकद चढ़ावे की गिनती को लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ हुए एमओयू के विभिन्न पहलुओं पर भी बैठक में चर्चा हुई. बैठक के दौरान बैंक की जिम्मेदारियों और उनके अनुपालन की समीक्षा की गई. ट्रस्ट ने बताया कि हाल में सामने आई अनियमितताओं को लेकर बैंक की प्रतिक्रिया पूरी तरह संतोषजनक नहीं रही. इसी कारण ट्रस्ट ने अपनी *वित्त समिति को एसबीआई के साथ मौजूदा व्यवस्था और SOP की पुनर्समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं.

CEO चयन के लिए और समय

बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर भी चर्चा हुई. चयन समिति ने बताया कि इस पद के लिए 5 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं. सभी आवेदनों की विस्तृत जांच और मूल्यांकन के लिए समिति ने एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा है. ट्रस्ट ने इस मांग को स्वीकार कर लिया.

सचिव पद पर नियुक्ति को मंजूरी

चूंकि मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए ट्रस्ट ने प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रखने के लिए सचिव पद पर नियुक्ति को मंजूरी दे दी. ट्रस्ट का मानना है कि भविष्य में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करना आवश्यक है.

श्रद्धालुओं की संख्या पर नहीं पड़ा असर

बैठक में ट्रस्ट ने यह भी कहा कि हाल के विवादों और विभिन्न आरोपों के बावजूद राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है. ट्रस्ट ने कहा कि आधारहीन, मिथ्या और भ्रामक आरोपों के बावजूद करोड़ों रामभक्तों की आस्था और विश्वास अडिग बना हुआ है. ट्रस्ट ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं, संत समाज तथा अयोध्या और अवध क्षेत्र के लोगों के प्रति आभार भी व्यक्त किया.

अब ट्रस्ट का होगा आधिकारिक प्रवक्ता

श्रद्धालुओं और समाज के बीच बेहतर संवाद बनाए रखने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने पहली बार आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करने का फैसला किया है. इसका मकसद भविष्य में किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रम की स्थिति से बचना और आधिकारिक जानकारी समय पर उपलब्ध कराना है.

न्यासियों की नियुक्ति में लगेगा और समय

बैठक में बताया गया कि ट्रस्ट में रिक्त पड़े न्यासी पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है. हालांकि इसके लिए अभी कुछ और सप्ताह का समय लग सकता है. मंदिर में पूजा-अर्चना की पारंपरिक शुद्धता और वैदिक परंपरा को बनाए रखने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने धार्मिक समिति का पुनर्गठन भी किया गया. स्वामी गोविंद देव गिरि को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है.

समिति में प्रमुख संतों और धर्माचार्यों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जिनमें—

  • जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधिपति स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती
  • मध्वपीठाधिपति स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज
  • स्वामी दीनेंद्रदास
  • स्वामी कमलनयनदास
  • स्वामी रामानंद दास
  • महंत राजकुमार दास

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