बांग्लादेश से विस्थापित 99 हिंदू परिवारों का मिलेगा स्थायी ठिकाना, योगी कैबिनेट में बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवारों के स्थायी पुनर्वासन को मंजूरी दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया. इन परिवारों को 0.50 एकड़ जमीन 30 साल के पट्टे पर दी जाएगी.
योगी सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन को लेकर बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट बैठक में विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवारों के स्थायी पुनर्वासन को मंजूरी दी गई. इन सभी 99 परिवारों का पुनर्वासन कानपुर देहात जिले की रसूलाबाद तहसील में किया जाएगा.
यह मामला मेरठ की तहसील मवाना के ग्राम नंगला गोसाई का है, जहां बांग्लादेश से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवार झील की भूमि पर लंबे समय से अवैध रूप से निवास कर रहे हैं. कैबिनेट के फैसले के अनुसार इन्हें अब स्थायी ठिकाना दिया जाएगा. इन परिवारों को 0.50 एकड़ जमीन 30 साल के पट्टे पर उपलब्ध कराई जाएगी.
इन परिवारों को 90 साल का पट्टा आवंटन होगा
विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों को कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में बसाया जाएगा. ग्राम भैंसाया में पुनर्वास विभाग के नाम दर्ज 11.1375 हेक्टेयर भूमि पर 50 परिवारों को और ताजपुर तरसौली में 10.530 हेक्टेयर भूमि पर शेष 49 परिवारों को बसाया जाएगा. साथ ही प्रत्येक परिवार को 0.50 एकड़ भूमि 30 वर्ष के पट्टे पर आवंटित की जाएगी.
यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विस्थापित परिवारों के सम्मानजनक और सुरक्षित पुनर्वासन को सुनिश्चित करेगा. लंबे समय से अस्थायी हालात में रह रहे इन परिवारों को अब स्थायी ठिकाना और भविष्य की सुरक्षा मिल सकेगी. भूमि को 30 साल के बाद 30-30 साल के लिए 2 बार रिन्यू किया जा सकेगा, कुल 90 साल का पट्टा आवंटन किया जा सकेगा.
दस्तावेजों के अभाव में ‘शरणार्थी’ माना जाता था
पूर्वी पाकिस्तान से ये परिवार 1960 और 1970 के दशक में विस्थापित होकर आए थे. दशकों से ये परिवार उत्तर प्रदेश में रह रहे थे, लेकिन दस्तावेजों के अभाव में इन्हें ‘शरणार्थी’ माना जाता था. वहीं, अब मालिकाना हक मिलने के बाद इन परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा. इससे पहले 2022 में कानपुर देहात में 63 परिवारों को यह हक मिला था.
