सिटी मजिस्ट्रेट ने विरोध में तो डिप्टी कमिश्नर ने समर्थन में दिया इस्तीफा… आखिर UP में ये चल क्या रहा है?

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक हलके में अजीब स्थिति बन गई है. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने सरकार के विरोध में इस्तीफा दिया, तो अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर ने सरकार के समर्थन में. इस 'इस्तीफा बनाम इस्तीफा' के खेल ने यूपी के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है.

यूपी में इस्तीफा बनाम इस्तीफा Image Credit:

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक हल्के में अजीब स्थिति बन गई है. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया में सरकार के खिलाफ लिखते हुए सोमवार को इस्तीफा दिया था, अब मंगलवार को अयोध्या के जीएसटी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने सरकार के समर्थन में रिजाइन कर दिया है. उन्होंने अपना रिजाइन राज्यपाल को भेजते हुए एक वीडियो जारी किया है. इसमें उन्होंने कहा है कि वह इस सरकार का नमक खा रहे हैं और सरकार का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते.

जीएसटी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह साल 2023 से अयोध्या संभाग में राज्यकर विभाग के संभागीय उप आयुक्त (डिप्टी कमिश्नर) के पद पर तैनात थे. उन्होंने ऐलान किया है कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद वह अपने खुद के संसाधनों से समाज सेवा का काम करेंगे. उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने स्वाभिमान और विचारों के आधार पर लिया है. उनके रिजाइन के बाद यूपी में इस्तीफा बनाम इस्तीफा का खेल शुरू हो गया है.

अब क्या है नया बवाल?

जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे के बाद यूपी में नया विर्मश शुरू हो गया है. दरअसल इसकी शुरूआत बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के साथ शुरू हुई. उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ दुर्व्यवहार और यूजीसी के नए नियम का विरोध करते हुए इस्तीफा दिया था. उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि इस सरकार में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा हो रही है. उनके इस्तीफे पर ब्राह्मण समाज के लोग भी उनके समर्थन में खड़े हो गए थे.

इसलिए दिया प्रशांत ने इस्तीफा

अब अयोध्या के जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे में मुख्यमंत्री के प्रति निष्ठा प्रकट की. कहा कि इस प्रदेश का नमक खा रहे हैं. इसलिए प्रदेश की सरकार और मुख्यमंत्री का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते. उन्होंने यह बयान शंकराचार्य द्वारा सीएम योगी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर दिया है. उनके इस्तीफे की सूचना के बाद प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है.

क्या है मामला?

प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर विवाद हो गया था. इसके बाद वह धरने पर बैठ गए थे. इसी बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने नए नियम लागू कर दिए. इससे सवर्णों में असंतोष तो फैला ही, बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से रिजाइन कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार सवर्णों के खिलाफ है. उधर, अयोध्या में जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर ने भी इस्तीफा देकर सनसनी फैला दी. उन्होंने सरकार का समर्थन करते हुए इस्तीफा दिया है.

तूल पकड़ने लगा मामला

दो अधिकारियों के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल गरमा गया है. प्रशासनिक अधिकारी भी दो धड़ों में बंटते नजर आ रहे हैं. यही स्थिति राजनीतिक हलकों में भी नजर आ रही है. खुद सत्तारुढ़ बीजेपी के अंदर भी इस मुद्दे को लेकर असंतोष की स्थिति है. वहीं प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर भी इस विवाद में कूद पड़े हैं. उन्होंने विरोध करने वालों को सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी है.