UP में नया नियम, ओला-उबर जैसी कंपनियों को कराना होगा रजिस्ट्रेशन; ड्राइवर की रखनी होगी पूरी कुंडली
योगी सरकार ने यूपी में यात्री सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए ओला-उबर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है. मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के बाद यह फैसला लिया गया है. इसमें ड्राइवर का लाइसेंस, मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन और गाड़ी का फिटनेस टेस्ट जरूरी होगा. आवेदन व रिन्युअल शुल्क भी तय कर दिया गया है.
उत्तर प्रदेश में यात्री सुविधा बेहतर बनाने और यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के तहत ओला-उबर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है. यह जानकारी कैबिनेट की बैठक के बाद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने दी. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इसके लिए बताया कि भारत सरकार ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 में पिछले साल संशोधन किया था.
भारत सरकार के इस संशोधित नियम को उत्तर प्रदेश भी अपनाया जाएगा. उन्होंने बताया कि अब तक ओला-उबर पर कोई नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें नियंत्रित करने के लिए इनका पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है. इसके लिए आवेदन के साथ लाइसेंस और रिन्युअल शुल्क भी देना होगा. इसमें बताना होगा कि कौन गाड़ी चला रहा है, ड्राइवर का लाइसेंस, मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन हैं या नहीं.
गाड़ी की भी होगी जांच
इसके अलावा ओला-उबर में चलने वाली गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट आदि कराया जाएगा. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उत्तर प्रदेश में अब बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन के ओला-उबर में गाड़ी नहीं चला पाएंगे. यह व्यवस्था अधिसूचना जारी होने के साथ ही लागू हो जाएगी. परिवहन मंत्री के मुताबिक रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन की फीस 25 हजार रुपये रखी गई है. वहीं 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी.
हर 5 साल में होगा रिन्युअल
परिवहन मंत्री के मुताबिक हर पांच साल में लाइसेंस का रिन्यूअल होगा. रिन्युअल के लिए पांच हजार रुपये फीस तय की गई है. उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के लिए एक ऐसा ऐप भी विकसित किया जाएगा, जिससे इन गाड़ियों से संबंधित समस्त जानकारी पब्लिक डोमेन में रहे. यात्रा से पहले यात्री ड्राइवर और गाड़ी की पूरी जानकारी इस ऐप के जरिए हासिल कर सकेंगे. किसी तरह की दिक्कत होने पर इस ऐप पर शिकायत भी दर्ज कराई जा सकेगी.
